अवैध निर्माण पर स्टे देने से नागपुर हाई कोर्ट नाराज, राज्य सरकार को फटकार, पूछा- किस अधिकार से लगाई रोक

Nagpur High Court: शंकर नगर में अवैध निर्माण पर सरकार द्वारा स्टे लगाने से नागपुर हाई कोर्ट नाराज। कोर्ट ने सरकार से पूछा- किस अधिकार के तहत नोटिस पर रोक लगाई, अधिकारी पर होगी कार्रवाई।
Nagpur HC slams state govt for staying demolition notices against illegal constructions in Shankar Nagar. Court demands legal justification or correction of error
कोर्ट प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स - सोशल मिडिया)
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Nagpur High Court Illegal Construction: नागपुर शहर के अलग-अलग हिस्सों के साथ ही विशेष रूप से शंकर नगर परिसर में फूड जॉइंट्स, रेस्टोरेंट्स और अन्य ऐसे प्रतिष्ठानों के कारण आम नागरिकों को हो रही परेशानी को लेकर ललित हारोडे की ओर से हाई कोर्ट में फौजदारी जनहित याचिका दायर की गई। गुरुवार को याचिका पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार को उस समय हाई कोर्ट की नाराजगी झेलनी पड़ गई, जब अधिकार क्षेत्र के बाहर जाकर सरकार द्वारा कार्रवाई पर रोक लगाए जाने का खुलासा हुआ।

सुनवाई के दौरान मनपा की ओर से पैरवी कर रहे अधि। जेमीनी कासट ने कोर्ट को बताया कि अवैध निर्माण कार्य के खिलाफ एमआरटी की धारा 53 के तहत जोनल कार्यालय की ओर से नोटिस जारी किया था किंतु सम्पत्तिधारक ने इसके खिलाफ सरकार के पास अपील दायर की, जिसके बाद सरकार ने रोक लगा दी। इस संदर्भ में कड़ी आपत्ति दर्ज करते हुए कोर्ट ने कहा कि एमआरटीपी कानून अंतर्गत सरकार ने किस अधिकार क्षेत्र में रोक लगाई, इसका जवाब देने के आदेश भी दिए।

अधिकारी को नहीं बख्शा जाएगा

सुनवाई के बाद अदालत ने सरकार के अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठाते हुए स्पष्टीकरण मांगा है और संबंधित अधिकारी पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी है। कोर्ट ने नागपुर मनपा के वकील को बताया कि यदि पूरे मामले में अधिकारी की कोताही उजागर होती है, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। सुनवाई के दौरान बताया गया कि इस अवैध निर्माण को लेकर मनपा ने वर्ष 2016 में ही अपना कर्तव्य निभाते हुए एमआरटीपी अधिनियम की धारा 53 के तहत नोटिस जारी किए थे लेकिन राज्य सरकार ने निगम के इन नोटिसों पर तुरंत प्रभाव से रोक लगा दी थी।

अदालत ने इस बात पर घोर आश्चर्य व्यक्त किया कि राज्य सरकार एमआरटीपी एक्ट में मौजूद कानूनी उपायों के विपरीत जाकर ऐसी अपीलों या कार्यवाही को कैसे स्वीकार कर सकती है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सरकारी वकील से सख्त लहजे में पूछा, आपके पास इसका अधिकार क्षेत्र कहां है? हमें दिखाएं कि क्या किसी भी प्रावधान के तहत धारा 53 के नोटिस के खिलाफ अपील करने का कोई नियम है?

जोनल अधिकारी पर गिर सकती है गाज

अदालत ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि राज्य सरकार अपना अधिकार क्षेत्र साबित करने या अपनी गलती सुधारने में विफल रहती है, तो अदालत उस अधिकारी के खिलाफ सीधे तौर पर कार्रवाई कर सकती है जिसने इस अपील को स्वीकार किया और रोक का आदेश पारित किया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि इस आदेश की सूचना और प्रतिलिपि आज ही संबंधित अधिकारी को तत्काल प्रभाव से उपलब्ध कराई जाए।

सरकार को अल्टीमेटम

इस गंभीर मामले में न्यायालय ने राज्य सरकार को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। अदालत ने सरकार के सामने दो स्पष्ट शर्ते रखी हैं, जिसके अनुसार या तो सरकार वह कानूनी प्रावधान दिखाए जिसके तहत उसे धारा 53 के नोटिसों की कार्यवाही में दखल देने और स्टे लगाने का अधिकार प्राप्त है या यदि सरकार के पास ऐसा कोई अधिकार नहीं है, तो वह अपनी इस गलती को सुधारे।

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