TET के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट की शरण में पहुंचे टीचर्स, आरपार के संघर्ष के लिए तैयार
Teacher Eligibility Test: शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ महाराष्ट्र राज्य जूनी पेंशन संगठन ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। शिक्षकों ने अब आरपार की लड़ाई की तैयारी कर ली है।
- Written By: प्रिया जैस
सुप्रीम कोर्ट (डिजाइन फोटो)
Teachers against TET: महाराष्ट्र राज्य जूनी पेंशन संगठन ने शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य करने के सर्वोच्च न्यायालय के फैसले की समीक्षा हेतु सुको के वकील गगन सांघी के माध्यम से सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दायर की। इस अवसर पर संगठन की ओर से वकील को टीईटी से संबंधित विभिन्न दस्तावेज दिए गए और न्यायिक मामले पर गहन चर्चा की गई।
विधान परिषद सदस्य एड. अभिजीत वंजारी का भी इस याचिका को समर्थन मिला है। उन्होंने वादा किया कि सर्वोच्च न्यायालय के साथ न्यायिक लड़ाई में शिक्षकों के पक्ष में फैसला आने तक वे पीछे नहीं हटेंगे। इसके लिए संगठन के प्रदेश अध्यक्ष आशुतोष चौधरी लगातार विधायकों से चर्चा और फॉलोअप कर रहे हैं।
संगठन लड़ेगा कानूनी लड़ाई
इस न्यायिक प्रक्रिया के लिए संगठन के प्रदेश अध्यक्ष वितेश खांडेकर, सचिव गोविंद उगले, प्रदेश अध्यक्ष आशुतोष चौधरी, सोशल मीडिया प्रमुख विनायक चतुर्वेदी और सलाहकार सुनील दुधे दिल्ली में मौजूद थे। पदाधिकारियों ने बताया कि संगठन टेट को लेकर पूरी कानूनी लड़ाई लड़ेगा, साथ ही मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से फिर मुलाकात कर फॉलोअप लिया जाएगा।
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टीईटी पर पुनर्विचार याचिका का निर्णय लेगी सरकार
नागपुर में शालेय शिक्षा राज्य मंत्री पंकज भोयर ने कहा कि 13 फरवरी 2013 के निर्णय के अनुसार राज्य में शिक्षकों के लिए नीतिगत मामले के रूप में टीईटी परीक्षा अनिवार्य कर दी गई है। इस संबंध में विभिन्न शिक्षक संगठनों द्वारा व्यक्त की गई भावना और मांगों के अनुसार 2013 से पहले के शिक्षकों पर इस निर्णय को पूर्वव्यापी प्रभाव से लागू करना उचित नहीं होगा।
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उन्होंने स्पष्ट किया कि इस संबंध में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले पर विचार करने के बाद सरकार द्वारा रिव्यूव पीटिशन दायर करने पर वरिष्ठ स्तर पर विचारों का आदान-प्रदान करने के बाद जल्द ही निर्णय लिया जाएगा। वे रवि भवन में विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों और शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ आयोजित एक बैठक में बोल रहे थे।
