प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Chhatrapati Sambhajinagar Pathology Diagnosis: छत्रपति संभाजीनगर राज्य की विकृतिविज्ञान प्रयोगशालाओं की सटीक निदान क्षमता के मूल्यांकन में सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (घाटी) की सायटोलॉजी प्रयोगशाला ने राज्य में तीसरा स्थान प्राप्त किया है।
साथ ही सरकारी कैंसर अस्पताल की प्रयोगशाला भी शीर्ष दस में शामिल हुई है, जिससे शहर के चिकित्सा क्षेत्र का गौरव बढ़ा है। यह शहर की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था की गुणवत्ता को रेखांकित करता है।
साइटोलॉजी एसोसिएशन तथा राज्य के 36 मेडिकल कॉलेजों की सहभागिता से आयोजित दो दिवसीय राज्यस्तरीय परिषद एमजीएम में हुई, इसमें लगभग 350 विकृतिविज्ञान विशेषज्ञ मौजूद रहे।
टाटा मेमोरियल व केईएम अस्पताल के विशेषज्ञों सहित राज्य के वरिष्ठ विकृतिविज्ञानियों ने सायटोलॉजी की नई तकनीक, कैंसर निदान की सटीकत्ता तथा प्रयोगशाला प्रबंधन पर मार्गदर्शन दिया। सटीक डायग्नोसिस, सैंपल की गुणवत्ता, तकनीकी एफिशिएंसी व रिपोर्ट प्रेजेंटेशन जैसे मानकों के आधार पर सरकारी, अर्धसरकारी, मनपा व निजी चिकित्सा कॉलेजों की प्रयोगशालाओं की शीर्ष दस सूची घोषित की गई।
निरीक्षक के रूप में डॉ. अरविंद गायकवाड ने जिम्मेदारी निभाई। घाटी अस्पताल की प्रयोगशाला की राज्य में तीसरा स्थान प्राप्त हुआ। इस सफलता में डॉ. प्रगती फुलगिरकर, डॉ. वैशाली नागोसे, डॉ. सुनीता शेरे, डॉ. अंजली कुलकर्णी व डॉ. शुभज्योती पोरे का महत्वपूर्ण योगदान रहा। अधिष्ठाता डॉ. शिवाजी सुक्ने तथा विभागाध्यक्ष डॉ. भारत सोनवर्ण के मार्गदर्शन में यह उपलब्धि हासिल की गई।
सायटोलॉजी विभिन्न रोगी, विशेषकर कैसर के प्रारंभिक व विश्वसनीय निदान की महत्वपूर्ण शाखा मानी जाती है। नमूनों की सुक्ष्म जांब, कठौर गुणवत्ता नियंत्रण व समय पर प्रतिवेदन प्रस्तुत करना उपचार प्रक्रिया में निर्णायक भूमिका निभाता है।
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घाटी की सायटोलॉजी प्रयोगशाला ने निरंतर गुणवता व तकनीकी दक्षता के आधार पर यह स्थान प्राप्त किया है, जबकि सरकारी कैंसर अस्पताल की प्रयोगशाला का शीर्ष दस में स्थान पाना उच्च स्तर की पुष्टि करता है।