नागपुर में 41 करोड़ के MACT ट्रेजरी घोटाले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, सीए सचिन गांधारे को मिली जमानत

Nagpur MACT Treasury Scam: नागपुर जिला अदालत के 41 करोड़ रुपये के MACT ट्रेजरी घोटाले में आरोपी सीए सचिन गांधारे को सुप्रीम कोर्ट ने लंबी कैद पर सवाल उठाते हुए जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।
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सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया की इमारत (सोर्स: सोशल मीडिया)
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CA Sachin Gandhare Bail: नागपुर शहर के बहुचर्चित नागपुर जिला अदालत के मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT) से जुड़े 41 करोड़ रुपये के विशाल ट्रेजरी घोटाले में आरोपी चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) सचिन नत्थूजी गांधारे को सर्वोच्च न्यायालय से बड़ी राहत मिल गई है। उच्चतम न्यायालय के न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति चंद्रशेखर की पीठ ने मामले की गंभीरता से सुनवाई करते हुए आरोपी सचिन गांधारे की जमानत याचिका को स्वीकार कर लिया और उन्हें तुरंत रिहा करने का निर्देश दिया।

इस पूरे महा-घोटाले का पर्दाफाश नागपुर जिला न्यायालय के एमएक्ट विभाग में कार्यरत कनिष्ठ लिपिक (Junior Clerk) सह नाजिर दिगंबर डेरे के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी (FIR) से हुआ था। विभिन्न बीमा कंपनियों द्वारा मोटर दुर्घटना दावों के निपटारे के तहत मुआवजे की बड़ी-बड़ी राशियां चेक के जरिए बैंक खातों में जमा की जाती थीं।

इस भारी-भरकम राशि को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा उपलब्ध कराए गए NEFT सॉफ्टवेयर के माध्यम से वास्तविक पीड़ितों और लाभार्थियों के बैंक खातों में ट्रांसफर करने की पूरी जिम्मेदारी दिगंबर डेरे के पास थी। इसी प्रक्रिया में सॉफ्टवेयर और बैंक खातों से हेरफेर कर करोड़ों रुपये के गबन का सनसनीखेज मामला सामने आया था।

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सीए पर फर्जी कंपनियां खोलकर 41 करोड़ ट्रांसफर कराने का था आरोप

जांच एजेंसी व अभियोजन पक्ष के अनुसार, चार्टर्ड अकाउंटेंट सचिन गांधारे ने मुख्य आरोपी दिगंबर डेरे और अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर सरकारी खजाने से 41 करोड़ रुपये की राशि अवैध रूप से अपने और अपने करीबियों के खातों में डायवर्ट करने की साजिश रची थी। आरोपी सीए पर यह संगीन आरोप लगाया गया था कि उन्होंने दिगंबर डेरे के परिजनों और रिश्तेदारों के नाम पर कागजी और फर्जी (Shell) कंपनियां/फर्म खोलने में मुख्य भूमिका निभाई थी।

लंबी कैद पर शीर्ष अदालत का कड़ा रुख, जमानत मंजूर

सर्वोच्च न्यायालय ने मामले की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष की दलीलों और पेश किए गए तथ्यों को गंभीरता से परखा। अदालत ने स्पष्ट माना कि मामले की सुनवाई में अत्यधिक देरी की स्थिति में और बिना किसी पुख्ता या ठोस सबूत के किसी आरोपी को अनिश्चितकाल के लिए जेल में बंद रखना न्याय के सिद्धांतों के अनुकूल नहीं है। इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने सीए सचिन गांधारे को तत्काल जमानत पर रिहा करने का फैसला सुनाया।

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