नागपुर सोनेगांव जलभराव पर HC सख्त, नागरिकों की परेशानी पर मांगा जवाब, जल निकासी व्यवस्था सुधारने के निर्देश
Nagpur Waterlogging Issue: सोनेगांव तालाब क्षेत्र में जलभराव की समस्या पर हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया। अदालत ने अधिकारियों से स्थायी समाधान और जल स्तर प्रबंधन पर जवाब मांगा है।
- Written By: अंकिता पटेल
जलभराव समस्या पर हाई कोर्ट सख्त,(सोर्स: सोशल मीडिया)
Nagpur Waterlogging Issue Municipal Action: नागपुर जल निकासी और सोनेगांव तालाब के जल स्तर प्रबंधन की समस्या को लेकर हाल ही में हुई सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में जलभराव की जो स्थिति है उसे और बिगड़ने नहीं दिया जा सकता तथा जनता की सुविधाओं को सर्वोपरि रखा जाना चाहिए। इस दौरान पानी की जांच रिपोर्ट और सोनेगांव तालाच के जल स्तर के रिकॉर्ड को भी आधिकारिक रूप से दर्ज करने का सुझाव दिया गया।
हाई कोर्ट ने तालाब के आसपास के इलाकों में जलभराव और निवासियों को हो रही भारी परेशानियों को गंभीरता से लेते हुए मामले पर स्वतः संज्ञान लिया, संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर इस जलभराव की समस्या को दोबारा उत्पन्न होने से रोकने के लिए उठाए जा रहे कदमों की जानकारी मांगी थी। अदालत मित्र अधि, मराठे तथा मनपा के अधि, कासट ने पैरवी की।
स्टॉर्म वाटर ड्रेन प्रोजेक्ट की स्थिति
बुधवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि जलभराव की समस्या से निपटने के लिए स्टॉर्म वाटर ड्रेन का एक प्रमुख कार्य हाथ में लिया गया है। संबंधित एजेंसी ने बताया कि इस कार्य के लिए वर्क ऑर्डर (कार्यदिश) पहले ही जारी किया जा चुका है लेकिन एक पूर्व मौखिक आदेश के कारण आंतरिक लाइनों पर काम शुरू नहीं किया जा सका है।
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एजेंसी ने एक अंडरटेकिंग दी है कि जब तक उन्हें विधिवत अनुमति नहीं मिल जाती वे अंदरूनी हिस्सों में काम शुरू नहीं करेंगे। हालांकि पानी की निकासी सुनिश्चित करने के लिए बाहरी क्षेत्रों में काम शुरू कर दिया गया है। ताकि जो भी पानी जमा हो उसे बाहर निकाला जा सके। अधिकारियों के अनुसार अब तक केवल 14 प्रतिशत पर ही काम हुआ है और आगे के कार्य के लिए अनुमति मांगी जा रही है।
विशेषज्ञों की राय और समाधान पर जोर
सुनवाई के दौरान यह चिंता जाहिर की गई कि कोई भी नया कदम समस्या को और गंभीर न करें, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि हमें इस समस्या का ठोस समाधान चाहिए, हमारी मुख्य चिता यह है कि आम लोगों को कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए।
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प्रशासन ने यह भी निर्णय लिया है कि यदि विशेषज्ञों की रिपोर्ट में इस समस्या का कोई व्यावहारिक समाधान सुझाया गया है और उन्होंने किसी योजना का खाका तैयार किया है तो उस योजना को लागू करने की छूट दी जानी चाहिए, फिलहाल लिखित आदेश के अभाव में केवल मौखिक निर्देशों के आधार पर काम रुका हुआ बा जिस पर अब विशेषज्ञों की राय से आगे का रास्ता साफ होने की उम्मीद है।
