महाराष्ट्र में जमीन मालिकों की बल्ले-बल्ले! क्लास-2 की खेती वाली जमीन को क्लास-1 में बदलना हुआ बेहद आसान
Maharashtra Land Conversion Rules: महाराष्ट्र सरकार ने सीलिंग के तहत मिली क्लास-2 की खेती की जमीन को क्लास-1 में बदलने के नए नियम जारी कर दिए हैं। जानें कैसे मिलेगा मालिकाना हक और कितना लगेगा शुल्क।
- Written By: आकाश मसने
जमीन (कॉन्सेप्ट फोटो, सोर्स: सोशल मीडिया)
Maharashtra Class 2 To Class 1 Land Conversion Rules 2026: महाराष्ट्र में जमीन के मालिकाना हक को लेकर सालों से चले आ रहे इंतजार को खत्म करते हुए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राजस्व और वन विभाग ने 4 मई 2026 को एक महत्वपूर्ण नोटिफिकेशन जारी किया है, जिसके तहत ‘सीलिंग’ एक्ट के जरिए आवंटित क्लास-2 की खेती की जमीन को अब क्लास-1 में आसानी से बदला जा सकेगा।
इस फैसले से जमीन मालिकों को अपने मालिकाना हक को मजबूत करने का मौका मिलेगा और सरकार की कमाई में भी बड़ी बढ़ोतरी होगी। राजस्व विभाग और वन विभाग ने 4 मई 2026 को एक नोटिफिकेशन जारी करके इन नए नियमों को लागू किया है। उम्मीद है कि इससे जमीन के लेन-देन, बैंक लोना प्रोसेसिंग और इन्वेस्टमेंट आसान हो जाएगा।
मुफ्त कानूनी मदद की मांग
इस फैसले का स्वागत करते हुए मराठी कंस्ट्रक्शन प्रोफेशनल फेडरेशन के जनरल सेक्रेटरी प्रकाश बाविस्कर ने मांग की कि यह प्रोसेस ट्रांसपेरेंट हो और समय पर लागू हो। उन्होंने यह भी सुझाव दिन कि आदिवासी फायदों के लिए एक खास कैंपेन चलाया जाए। जिला स्तर पर कैंप लगाकर मुफ्त कानूनी मदद दी जाए।
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प्रकाश बाविस्कर ने प्रशासन को पहल करने की जरूरत पर जोर दिया, क्योंकि कई परिवारों को रजिस्ट्रेशन प्रोसेस मुश्किल लगता है। इसमें प्रीमियम रेट एरिया के हिसाब से अलग-अलग होते हैं। उन्होंने कहा कि अगर सरकार एप्लीकेशन प्रोसेस, जरूरी डॉक्यूमेंट्स और फीस के बारे में साफ गाइडलाइंस जारी करती है, तो इस फैसले का फायदा जमीन मालिकों तक तेजी से मिलेगा।
कितना लगेगा प्रीमियम?
- नए नियमों के अनुसार, जमीन कन्वर्जन के लिए एरिया के हिसाब से सरचार्ज तय किया गया है।
- मेट्रोपॉलिटन और शहरी इलाके: रेडी रेकनर दर का 30% सरचार्ज लगेगा।
- अन्य इलाके (ग्रामीण): रेडी रेकनर दर का 25% सरचार्ज लगेगा।
- इस्तेमाल बदली गई जमीनें: यदि जमीन का उपयोग बदला गया है, तो यह दर 20% से 30% के बीच होगी।
- अधिकार: यदि जमीन की मार्केट वैल्यू 50 लाख रुपये तक है, तो जिलाधिकारी (Collector) इस पर फैसला ले सकते हैं। इससे अधिक मूल्य के मामलों में राज्य सरकार की मंजूरी अनिवार्य होगी।
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पेडिंग केस में और तेजी आने की प्रबल संभावना
नए नियमों के मुताबिक जमीन एक्वायर हुए कम से कम 10 साल बीत जाने के बाद ही कन्वर्जन के लिए अप्लाई किया जा सकता है। यह जरूरी है कि जमीन अलॉटमेंट की शर्तों का कोई वायलेशन न हो, और अगर वायलेशन होता है, तो पहले उसे रेगुलराइज करना जरूरी है। इसके लिए डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर को अप्लाई करना होगा और 3 महीने के अंदर वेरिफिकेशन और 15 दिन के अंदर फाइनल ऑर्डर जारी करने का प्रोविजन किया गया है। इससे पेंडिंग केस में तेजी आने की प्रबल संभावना है।
