Nagpur High Court: आदेशों के पालन में देरी पर विभाग से जवाब तलब, सचिव को फिलहाल राहत

Nagpur High Court PIL: नागपुर हाई कोर्ट बार एसोसिएशन की याचिका पर सुनवाई में कोर्ट सख्त। आदेश पालन में देरी पर विभाग से जवाब तलब, सचिव को फिलहाल राहत।
Nagpur High Court: Department Asked to Explain Delay in Complying with Orders; Secretary Granted Interim Relief
नागपुर हाई कोर्ट पीआईएल,(सोर्स: सोशल मीडिया)
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Nagpur High Court Bar Association: नागपुर हाई कोर्ट बार एसोसिएशन द्वारा अदालत के बुनियादी ढांचे को लेकर जनहित याचिका दायर की गई। याचिका पर सोमवार को सुनवाई के बाद न्यायाधीश अनिल किलोर और न्यायाधीश राज वाकोडे ने आदेश के अनुपालन में देरी पर विभाग से जवाब तलब किया है, साथ ही फिलहाल सचिव को पेशी से अस्थायी राहत भी प्रदान की।

न्यायालय ने सुनवाई के दौरान विभागीय कार्यप्रणाली और अदालती आदेश के पालन में हो रही देरी पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने 19 अगस्त 2025 के आदेश के अनुपालन मामले में फिलहाल सचिव को व्यक्तिगत पेशी से छूट दे दी है।

हालांकि अदालत ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि भविष्य में 20 अप्रैल 2026 के आदेश को वापस लेने की याचिका पर विचार पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करेगा कि विभाग पुराने आदेश के पालन में कितनी तेजी और प्रगति दिखाता है।

बैठकों के दौर पर अदालत ने उठाए सवाल

सुनवाई के दौरान अदालत ने विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए पूछा कि अगस्त 2025 से लेकर अब तक इस मुद्दे पर कितनी बार चर्चा हुई है। अदालत ने कहा कि प्रबंधन और संबंचित उपयोगकर्ता विभाग के बीच क्या 15 या 16 बैठके हो चुकी है? यह स्पष्ट नहीं है कि जितनी भी बैठके हुई है।

इन बैठकों में मुख्य विषय पर कोई दौरा चर्चा हुई भी है या नहीं। इसके साथ ही मामले में मुख्य न्यायाधीश के समक्ष आवेदन प्रस्तुत करने पर भी बहस हुई जिस पर यह तर्क दिया गया कि यह मामले के पुनर्विचार की श्रेणी में आ सकता है।

सचिव की पेशी पर लटकी तलवार

सोमवार को सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सचिव को पेशी से अभी केवल फौरी छूट दी गई है। अदालत ने कड़ा संदेश देते हुए कहा कि यदि विभाग 19 अगस्त 2025 के आदेश के अनुपालन में कोई संतोषजनक प्रगति नहीं दिखाता है तो अदालत सचिव को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश देगी और पुराना आदेश यथावत रहेगा।

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