नागपुर में करोड़ों के मेगा प्रोजेक्ट्स पूरे, लेकिन कुछ निधि के लिए वर्षों से लटके हैं ये महत्वपूर्ण प्रकल्प
Nagpur Development: नागपुर में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पूरे होने के बावजूद कई छोटे लेकिन महत्वपूर्ण विकास कार्य वर्षों से अटके हैं। मंजूरी व फंड मिलने के बाद भी तकनीकी बाधाएं बनी हुई हैं।
- Written By: अंकिता पटेल
नागपुर विकास, अधूरे प्रकल्प, गणेशपेठ बस स्टैंड दुरावस्था,(सोर्स: सोशल मीडिया)
Nagpur Pending Projects: नागपुर सिटी में अनेक अकल्पनीय विकास कार्य केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी और डीसीएम देवेन्द्र फडणवीस ले आए और पूर्ण भी करवाये। करोड़ों के बड़े-बड़े प्रोजेक्ट तो पूर्ण हो गए लेकिन अनेक ऐसे प्रकल्प जिनके लिए कुछ करोड़ की ही निधि की जरूरत है वे वर्षों से लटके हुए हैं। अनेक तो कागजी प्रक्रिया में ही लटके हैं।
जिन्हें मंजूरी के बाद निधि भी मिल चुकी है वे कहीं तकनीकी अड़चनों में तो कहीं अधिकारियों की लचर व सुस्त कार्यप्रणाली के चलते बेहद ही धीमी गति से रुक-रुक कर चल रहे हैं। जो कागजों में लटके हैं उनमें महिला बचत गट माल, किसान बचत गट माल, मौजा लेंड्रा में शिवसृष्टि सहित अन्य कुछ प्रकल्प हैं। इनमें से अधिकतर की तो कई वर्षों से केवल घोषणाएं ही हो रही हैं।
कुछ ऐसे भी हैं जिनके कार्य शुरू किये गए हैं लेकिन पूर्ण कब होंगे, कोई बताने वाला नहीं है। उमरेड रोड स्थित स्टेडियम तो वर्षों से अधूरा पड़ा हुआ है। अंबाझरी उद्यान परिसर को लेकर जो सपने दिखाए गए वह भी कब पूरा किया जाएगा, यह बताने वाला कोई नहीं है।
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स्टेडियम, पुराना भंडारा रोड बना रहे रिकॉर्ड
उमरेड रोड स्थित क्रीड़ा संकुल और मध्य नागपुर में पुराना भंडारा रोड तो लेटलतीफी का रिकॉर्ड बना रहे हैं। स्टेडियम वर्षों से आधा-अधूरा पड़ा हुआ है। इसे तेजी से पूर्ण करवाने में न अधिकारियों की और न ही क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों की रुचि है। 3 वर्ष हुए इस स्टेडियम के लिए निधि मंजूर हुई थी। दक्षिण नागपुर में जम्बूदीपनगर का नाला लोगों के लिए मुसीबत बना हुआ था।
कुछ कार्य हुए लेकिन अनेक हिस्सों में काम ही नहीं किये गए। इस बारिश भी यह नागरिकों के लिए सिरदर्द बनने वाला है। पुराना भंडारा रोड तो 26 वर्षों से लेटलतीफी का शिकार है। प्रॉपर्टी अधिग्रहण हुआ और रोड निर्माण भी शुरू हुआ लेकिन अड़ंगा पूरी तरह दूर नहीं हुआ।
एसटी स्टैंड दुरावस्था की चपेट में
राज्य भर में यहां का गणेशपेठ बस स्टैंड सबसे दुरावस्था वाला बस स्टैंड है कहें तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। बैंगलुरु की तर्ज पर नागपुर एसटी स्टैंड को विकसित कर यात्रियों के लिए सुविधाएं उपलब्ध कराने की घोषणाएं अनेक बार हुई।
एसटी महामंडल अपनी कमाई से इसे साकार नहीं कर सकता, सरकार को चिंता नहीं है। यहां कुछ सुविधाएं बढ़ाई गई है लेकिन अत्याधुनिकीकरण का जो दावा किया गया था वह तो नजर ही नहीं आता। हालात यह है कि भीषण गर्मी में यहां के पंखे तक बंद रहते हैं। केवल सड़कों व पुलिया पर ध्यान केन्द्रत है लेकिन नागरिकों से सीधे जुड़े अन्य प्रकल्पों को तेजी से पूर्ण करने में लेटलतीफी की जा रही है।
तालाबों का विकास, कछुआ चाल
अंचाझरी उद्यान को शेगांव के आनंद सागर की तर्ज पर विकसित करने का तो जनता बस सपना ही देख रही है। फुटाला लेक परिसर में करोड़ों रुपये फूंके गए और जिस जनता का पैसा फूंका गया वही उसका आनंद उठाने से वंचित है।
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सिटी के मध्य स्थित गाधीसागर यानी शुक्रवारी तालाब का गहरीकरण तो हुआ लेकिन सौंदर्यीकरण का कार्य लटका हुआ है। दक्षिण नागपुर में सक्करदरा तालाब और उससे सटे उद्यान का भी ऐसा ही हाल है। कभी काम शुरू होता है तो कभी अचानक महीनों बंद पड़ जाता है।
सोनेगांव तालाब का गहरीकरण किया गया लेकिन परिसर का सौंदर्याकरण ठप है। नाईक तालाब, पुलिस लाइन टाकली तालाब की दुर्दशा किसी से छिपी नहीं है।
