नागपुर न्यूज
North Nagpur Prabhag 2A: उत्तर नागपुर के प्रभाग 2-अ स्थित श्रावस्तीनगर बस्ती में रहने वाले हजारों नागरिक आज भय, गंदगी और बीमारी के बीच जीवन जीने को मजबूर हैं। चारों ओर खुले और जाम पड़े नालों से घिरी यह बस्ती अब धीरे-धीरे ‘बीमारी का केंद्र’ बनती जा रही है लेकिन नगर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की नींद अब तक नहीं खुली है।
बस्ती के चारों तरफ बहने वाले नालों की महीनों से सफाई नहीं हुई है। नतीजा यह है कि नाले कचरे, सड़े-गले अपशिष्ट और प्लास्टिक से पूरी तरह भर चुके हैं। इन्हीं नालों में सुअर, आवारा कुत्ते और अन्य जानवर दिनभर विचरण करते दिखाई देते हैं जिससे पूरे इलाके में असहनीय गंदगी और संक्रमण का माहौल बना हुआ है।
सबसे गंभीर और चौंकाने वाली बात यह है कि इन्हीं गंदे नालों के ऊपर से पीने के पानी की पाइप लाइन गुजर रही है। नागरिकों को आशंका है कि नालों का दूषित गंदा पानी किसी भी समय पाइप लाइन में रिसकर घरों तक पहुंच सकता है। बावजूद इसके, संबंधित विभाग आंख मूंदे बैठा है।
निचले इलाके में स्थित होने के कारण बारिश के दिनों में श्रावस्तीनगर बस्ती की स्थिति और भयावह हो जाती है। हल्की बारिश में ही नाले ओवरफ्लो हो जाते हैं और गंदा पानी लोगों के घरों में घुस जाता है। कई परिवारों को घुटनों तक भरे नाली के पानी में रहना पड़ता है। बच्चों का स्कूल जाना मुश्किल हो जाता है, बुजुर्गों और बीमार लोगों की हालत बदतर हो जाती है।
– सूरज शेंडे, स्थानीय नागरिक।
दिनभर फैली रहने वाली गंदी बदबू और मच्छरों के बढ़ते प्रकोप से मलेरिया, डेंगू और वायरल बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है। इसके बावजूद न तो दवा का छिड़काव किया जाता है और न ही फॉगिंग की कोई व्यवस्था है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि वर्षों से मनपा का स्वास्थ्य विभाग इस इलाके में शायद ही कभी नजर आया हो।
– सरताज शेख, स्थानीय नागरिक।
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नागरिकों का आरोप है कि कई बार मौखिक और लिखित शिकायतें करने के बावजूद सफाई व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हुआ। नालों की नियमित सफाई, पाइप लाइन की सुरक्षा और बरसात से पहले स्थायी समाधान जैसे मुद्दों पर सिर्फ आश्वासन मिलते रहे लेकिन जमीनी स्तर पर कोई काम नहीं हुआ।
– राधिका वरखेड़े, स्थानीय नागरिक।
चुनाव के समय वोट मांगने वाले जनप्रतिनिधि जीतने के बाद इस बस्ती की सुध लेना भी जरूरी नहीं समझते। न तो क्षेत्र का दौरा किया जाता है और न ही नागरिकों की समस्याएं सुनी जाती हैं। सवाल यह उठता है कि क्या श्रावस्तीनगर के नागरिक नगर प्रशासन के लिए दूसरे दर्जे के नागरिक हैं?
– सानिया शेख, स्थानीय नागरिक।
नागपुर शहर के बस्तीवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही नालों की सफाई, दवा छिड़काव और बरसात पूर्व ठोस उपाय नहीं किए गए तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे। नागरिकों का साफ कहना है कि यदि किसी महामारी की स्थिति बनी तो इसकी पूरी जिम्मेदारी नगर प्रशासन और संबंधित जनप्रतिनिधियों की होगी।