नागपुर के बाजारों में ‘छुट्टे पैसों’ का अकाल! 10, 20 और 50 के नोट गायब होने से छोटे कारोबारी बेहाल
Nagpur Small Denomination: नागपुर में 10, 20 और 50 रुपये के छोटे नोटों की भारी किल्लत से आम लोग और छोटे व्यापारी परेशान हैं। रोजमर्रा के नकद लेन-देन और छोटे कारोबार प्रभावित हो रहे हैं।
- Written By: अंकिता पटेल
छोटे नोट, नकदी संकट, नागपुर बाजार, (सोर्स: सोशल मीडिया)
Nagpur Market Cash Shortage: नागपुर 10, 20 और 50 रुपये के छोटे नोटों की भारी किल्लत से आम लोग परेशान हो गये हैं। इसके चलते आम लोगों के साथ-साथ छोटे कारोबारियों को भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बैंक शाखाओं से छोटे नोट नहीं मिल पा रहे हैं, जिससे रोजमर्रा के नकद लेन-देन, स्थानीय परिवहन और छोटे कारोबार प्रभावित हो रहे हैं।
स्थानीय बाजारों में स्थिति यह देखी जा रही है कि ग्राहक खरीदारी के बाद छुट्टे पैसे के लिए इधर-उधर भटकते नजर आ रहे हैं। दिन-प्रतिदिन बढ़ती गंभीर समस्या को देखते हुए कारोबारियों का कहना है कि आरबीआई को इसे ध्यान में रखते हुए छोटे नोटों के वितरण और कॉइन मेला दोबारा शुरू करना चाहिए। कारोबारियों का कहना है कि जहां एक ओर 100, 200 और 500 रुपये के नोट आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं वहीं छोटे मूल्य वाले नोटों की उपलब्धता लगभग नगण्य हो गई है।
कब निकलेंगे एटीएम से छोटे नोट
कुछ महीने पहले सरकार छोटे नोटों की उपलब्धता को बेहतर बनाने के लिए एटीएम से छोटे नोट निकलने की सुविधा देने के लिए काम कर रही थी, लेकिन अब तक इस प्रोजेक्ट का कुछ नहीं हुआ। अब न तो इसके बारे में कोई चचर्चा हो रही है और न ही इसे आगे बढ़ाने का विचार नजर आ रहा है। इसके चलते लोगों की परेशानी बढ़ती जा रही है।
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रोजमर्रा की जरूरतों पर पड़ा असर
छोटे नोटों की कमी का सीधा असर आम आदमी की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ रहा है। स्थानीय परिवहन में किराया चुकाना मुश्किल हो गया है। किराने और सब्जी की खरीदारी में दुकानदार और ग्राहक दोनों परेशान हैं। छोटे दुकानदारों के पास छुट्टे न होने से लेन-देन में बार-बार विवाद की स्थिति बन रही है।
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छोटे मूल्य वाले नोटों के बिना दैनिक जरूरतों के लिए नकद लेन-देन करना बेहद कठिन हो गया है। सरकार और बैंक डिजिटल भुगतान को बढ़ावा दे रहे हों, लेकिन यह समस्या का पूरा समाधान नहीं है। लोग आज भी रोजमर्रा के छोटे खचर्चों के लिए नकद पर ही निर्भर है। डिजिटल भुगतान बढ़ने के बावजूद चलन में मौजूद कैश लगातार बढ़ रहा है। इसके बावजूद छोटे मूल्य वाले नोट बाजार में नजर नहीं आ रहे हैं।
सिक्कों से भी नहीं मिली राहत
छोटे नोटों की जगह सिक्कों के उपयोग को बढ़ावा देने की कोशिशें भी अब तक सफल नहीं हो पाई हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह सिक्कों की पर्याप्त उपलब्धता न होना और लोगों की सीमित स्वीकार्यता बताई जा रही है। व्यापारियों का कहना है कि बैंकों और आरबीआई काउंटरों के जरिये छोटे नोटों का पर्याप्त वितरण सुनिश्चित किया जाना बहुत जरूरी है।
