एयरपोर्ट की नकल में नागपुर स्टेशन पर ड्रॉप एंड गो बना लूट एंड गो; ठेकेदारों की मनमानी से लग रही वाहनों की कतार

Nagpur Railway Station: नागपुर और अन्य प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर लागू 'ड्रॉप एंड गो' सिस्टम सवालों के घेरे में है। आरोप है कि पार्किंग ठेकेदार वाहनों की कतारें धीमी कर अधिक शुल्क वसूल रहे हैं।
Modeled after the airport, the 'Drop and Go' facility at Nagpur station has turned into 'Loot and Go'; arbitrary actions by contractors are causing queues of vehicles.
नागपुर स्टेशन, रेल मंत्री वैष्णव(सोर्स: नवभारत फाइल फोटो)
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Nagpur Railway Station Parking Scam: नागपुर अब एयरपोर्ट की तर्ज पर प्रमुख स्टेशनों पर जारी 'ड्रॉप एंड गो' सिस्टम खुद सवालों के घेरे में है। यह बात और है कि यहां एयरपोर्ट की तरह न तो चौड़ी लेन हैं, न ही निकासी के लिए खुले रास्ते। नागपुर हो या दिल्ली स्टेशन, पार्किंग ठेकेदार जानबूझकर वाहनों की कतार जल्दी क्लीयर नहीं होने दे रहे, ताकि अधिक शुल्क वसूला जा सके।

'एक्स' पर वायरल वीडियो ने की पुष्टि

उल्लेखनीय है कि सबसे पहले 'नवभारत' ने नागपुर स्टेशन के प्लेटफॉर्म 8 पर 'ड्रॉप एंड गो' के पार्किंग ठेकेदार द्वारा कार चालकों के साथ टाइमिंग का खिलवाड़ उजागर किया था, अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर (https://x।com/Benarasiyaa/s tatus/2065685869055578265/vide 0/1 7s = 48 ) पोस्ट वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें एक कार चालक दिल्ली स्टेशन पर 'ड्रॉप एड गो' सिस्टम में ठेकेदार द्वारा लोगों से 'लूट' की पोल खोल रहा है। इस पोस्ट को 24 घंटे के भीतर ही 113.2 के व्यूज मिल चुके थे।

हर दिन 167 वाहन, लेकिन ऊंट के मुंह में जीरा

नागपुर स्टेशन के प्लेटफॉर्म-8 की ओर से हर महीने करीब 5,000 चारपहिया वाहन 6 मिनट के भीतर पार्किंग क्षेत्र से बाहर निकल रहे हैं। औसतन यह संख्या प्रतिदिन 167 वाहनों की बैठती है। हकीकत यह भी है कि हर दिन केवल एक ट्रेन 12290 नागपुर-मुंबई दूरंतो एक्सप्रेस के समय ही इससे दोगुनी या तिगुनी कारे इस पार्किंग में पहुंच जाती है। ट्रेन 12289 मुंबई-नागपुर दूरंतो या वंदे भारत एक्सप्रेस के समय संख्या का अंदाजा कठिन नहीं है। ऐसे में प्रतिदिन केवल 167 वाहन संख्या वास्तविक संख्या के आगे नगण्य प्रतीत होती है।

नागपुर में 6, दिल्ली में 8 मिनट... किसका गणित ?

नागपुर स्टेशन पर 'ड्रॉप एंड गो' के लिए 6 मिनट और दिल्ली में यह अवधि 8 मिनट रखी गई है। आखिर यह समय किस आधार पर तय किया गया? क्या किसी स्वतंत्र एजेंसी से यातायात सर्वे कराया गया? क्या स्टेशन परिसर की वास्तविक परिस्थितियों का अध्ययन हुआ? ऐसे में सवाल यह उठना लाजिमी है कि जब निकासी व्यवस्था ही सुचारु नहीं है तो इस समय सीमा का आधार क्या है? क्या यात्रियों को एयरपोर्ट की तर्ज पर सुविधा दी भी जा रही है या फिर लोगों को मिनटों के जाल में फंसाकर ठेकेदारों को लूटने की छूट दी जा रही है?

आय कमाने की नई सुविधा आखिर कितनी शिष्ट ?

किसी भी सुविधा का लेन-देन पारदर्शी और ईमानदारी से हो तो व्यवस्था शिष्ट मानी जाती है, लेकिन जब उसमे चालाकी, देरी और कथित साजिश शामिल हो जाए तो वही व्यवस्था भ्रष्ट हो जाती है।

रेलवे यदि सचमुच एयरपोर्ट जैसी सुविधा देना चाहता है, तो एयरपोर्ट जैसी जवाबदेही, निगरानी और निकासी व्यवस्था भी सुनिश्चित करनी होगी। अन्यथा 'ड्रॉप एंड गो' यात्रियों के लिए सुविधा कम और ठेकेदारों के लिए लूट का जरिया अधिक साबित होगी, तब हर स्टेशन पर यही सवाल गूंजेगा, रेलवे सुविधा दे रहा है या फिर लूट की खुली छूट?

रेल मंत्री को लेना होगा संज्ञान

हाल में जयपुर में एक स्टूडेंट ने आईआरसीटीसी वेबसाइट की खामियों पर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के सामने सुधार की मांग की थी। उन्होंने तुरंत अपने स्टाफ को कॉल करके अगले महीने में ही सुधार के साथ नई वेबसाइट का दावा कर दिया।

रेल मंत्री वैष्णव भी दिल्ली में बैठते हैं और उसी शहर के प्रमुख स्टेशन पर ड्रॉप एड गो' पर साजिश के साथ खुली लूट जारी है। इससे पहले कि यह बीमारी सभी प्रमुख स्टेशनों पर पहुंचे, उन्हें स्वयं इसके इलाज पर ध्यान देना होगा, ताकि आम नागरिकों में मन में भारतीय रेलवे और उनके प्रति 'रेल सेवा उपभोक्ताओं से लूट' वाली छवि न बनें।

सुधार के सारे प्रयास जारी

हमने कुछ सुधार किए है और जारी भी हैं। जाम के समय पार्किंग स्टाफ फंसी हुई गाड़ी के पास जाकर उनका टिकट काट रहा है। बजाय इसके कि वाहन के बूम तक आने का इंतजार करें, साथ ही डीसीपी ट्रैफिक के साथ समन्वय करके स्टेशन के बाहर ट्रैफिक को व्यवस्थित करने पुलिस तैनात कर रहे हैं, जो जाम का मुख्य कारण है। हम यात्रियों की परेशानी कम करने के लिए हर मुमकिन कोशिश कर रहे हैं।

-नवभारत लाइव के लिए नागपुर से सतीश दंडारे की रिपोर्ट

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