प्रफुल पटेल का एक फैसला बदलेगा चुनावी समीकरण! शिवसेना-NCP में पकी खिचड़ी, महायुति में फूट के संकेत
Maharashtra Politics: नागपुर निकाय चुनाव में भाजपा के अस्पष्ट रुख से शिंदे सेना और एनसीपी में नाराज़गी बढ़ी। दोनों दल साथ लड़ने के विकल्प तलाश रहे हैं। प्रफुल पटेल के निर्णय का इंतज़ार।
- Written By: प्रिया जैस
प्रफुल पटेल (सौजन्य - सोशल मीडिया)
Nagpur Municipal Elections: निकाय चुनावों में राज्य में दोनों ही गठबंधनों में शामिल दलों का एक साथ मिलकर चुनाव लड़ना संभव नहीं लग रहा है। महायुति की सत्ता राज्य में है और उसमें शिंदे शिवसेना और एनसीपी अजित पवार गुट शामिल हैं। लोकसभा व विधानसभा चुनाव तो बीजेपी के साथ गठबंधन कर लड़ा गया लेकिन निकाय चुनाव में ऐसा नजर नहीं आ रहा है।
भाजपा के आला नेता भले ही यह कह रहे हैं कि निकाय चुनाव भी महायुति के साथ ही लड़ा जाएगा लेकिन दूसरी ओर यह भी कह रहे हैं कि कुछ जगहों पर मैत्रीपूर्ण लड़ाई भी हो सकती है। चूंकि यह चुनाव कार्यकर्ताओं का है, इसलिए उनकी भावनाओं के अनुसार ही निर्णय लिया जाएगा।
एनसीपी-शिवसेना में नाराजगी
बीजेपी के इस विरोधाभासी रवैये के चलते नागपुर में शिंदे सेना व एनसीपी अजित पवार गुट में स्थानीय नेताओं में नाराजी व्याप्त है। यही कारण है कि अब दोनों पार्टी नेता नप-नपं, जिप, पंस, मनपा चुनाव में साथ आकर लड़ने की संभावना तलाश रही हैं। इस संदर्भ में विधायक कृपाल तुमाने के साथ एनसीपी शहर अध्यक्ष अनिल अहिरकर, कार्याध्यक्ष श्रीकांत शिवणकर की बैठक भी हुई है।
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नप-नपं चुनाव पर निर्णय नहीं
नगर परिषद व नगर पंचायत चुनाव लड़ने के इच्छुक उम्मीदवारों की तो 10 नवंबर यानी आज से नामांकन भरने की प्रक्रिया भी शुरू हो रही है, बावजूद इसके जिले में गठबंधन को लेकर बीजेपी की ओर से कोई निर्णय नहीं आया है। शिवसेना विधायक तुमाने, जिला प्रमुख संदीप इटकेलवार, विनोद सातंगे, चंद्रहास राऊत, एनसीपी के जिलाध्यक्ष राजाभाऊ टांकसाले, शहर अध्यक्ष अहिरकर, कार्याध्यक्ष शिवणकर, अमित कातुरे आदि के बीच इस संदर्भ में चर्चा हुई।
शिवसेना-एनसीपी (सौजन्य-नवभारत)
नगर परिषद व नगर पंचायत चुनाव के लिए तो अब उम्मीदवारों को टिकट वितरण का भी समय आ पहुंचा है। दोनों पार्टियों के स्थानीय नेता अब भाजपा को छोड़कर साथ आने की संभावना पर जोर दे रहे हैं। भाजपा के साथ लड़ा गया तो और भाजपा के बिना लड़ा गया तो सीटों के बंटवारे का समीकरण क्या होना इस पर भी चर्चा की गई।
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वोट विभाजन का भय
एनसीपी नेताओं का मानना है कि अगर गठबंधन तोड़कर अलग चुनाव लड़ा गया तो वोटों के विभाजन का अप्रत्यक्ष लाभ कांग्रेस को हो सकता है। भाजपा को भी इसका भान है, बावजूद इसके चुनावों में गठबंधन को लेकर उसकी ओर से सकारात्मकता नहीं दिखाई गई है। एनसीपी ने भाजपा को इस संदर्भ में पत्र भी लिखा लेकिन वहां से जवाब आया कि गठबंधन का निर्णय पार्टी के वरिष्ठ ही लेंगे।
प्रफुल पटेल के निर्णय का इंतजार
एनसीपी नेता प्रफुल पटेल 11 नवंबर को नागपुर आ रहे हैं। उन्हें शिंदे सेना के स्थानीय नेताओं के साथ हुई बैठक की जानकारी दे दी गई। उनके समक्ष महायुति और दोनों पार्टियों के गठबंधन का पर्याय रखा जाएगा। चर्चा के बाद वे जो निर्णय लेंगे वह स्वीकार होने की बात एनसीपी पदाधिकारियों ने बताई।
