Nagpur News: मनपा में घोटालों की गूंज, शिवसेना का हंगामा, जमकर नारेबाजी
- Written By: नवभारत डेस्क
नागपुर. सोमवार की दोपहर मनपा मुख्यालय उस समय नारों से गूंज उठा जब शिवसेना के शहर प्रमुख नितिन तिवारी के नेतृत्व में सैकड़ों कार्यकर्ता और कचरा संकलन करने वाली बीवीजी व एजी एन्वायरो कंपनी के कर्मचारी भी न्यायिक मांगों लेकर मनपा मुख्यालय पहुंच गए. लगभग 2 घंटे तक मुख्यालय नारों से गूंजता रहा. शिवसेना के मोर्चे की पूर्व जानकारी होने के कारण पहले से ही मनपा प्रशासन द्वारा पुख्ता पुलिस बंदोबस्त लगाया गया था.
कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस ने भी मुख्यालय के मुख्य दरवाजे पर मोर्चा संभाल रखा था. यहां तक कि किसी भी तरह की विपदा न हो इसके लिए मुख्यालय का गेट ही बंद रखा गया. इसकी वजह से काफी देर तक मुख्यालय के गेट पर ही नारेबाजी होती रही. 2 घंटे के लगातार प्रदर्शन के बाद मनपा आयुक्त से भेंट कर मांगें रखी गईं.
30 करोड़ का कचरा वाहन खरीदी में भ्रष्टाचार
चर्चा के दौरान बताया गया कि मनपा ने कचरा के ट्रांसपोर्ट के लिए 50 पोर्टेबल कॉम्पैक्टर और 16 क्यूबिक मीटर के हुक होल्डर खरीदी करने के लिए टेंडर मंगाया था जिसमें ब्लैक लिस्ट कंपनी को टेंडर में शामिल करने के उद्देश्य से यह शर्त निकाल दी गई. टेंडर की पहले रखी गई शर्त के अनुसार जो कंपनी 7 वर्ष के लिए ब्लैक लिस्ट हो चुकी है वह इसमें हिस्सा नहीं ले सकती थी. किंतु बाद में क्वारी नोएडा की टीपीएस कंपनी के लिए 5 वर्ष कर दिया गया जिसके लिए 2 जून 2023 को टेंडर का शुद्धिपत्रक भी निकाला गया. विशेषत: दिल्ली महानगर पालिका की ओर से इस कंपनी को 31 मई 2016 को ब्लैक लिस्ट किया गया था. इसी कंपनी को अब मनपा ने 23.80 करोड़ का टेंडर दिया है. टेंडर की शर्तों के अनुसार सभी वाहन संकलन कंपनियों को देना था. वाहनों की खरीदी के बाद ऑफ लाइन पद्धति से ऑपरेशन और मेंटेनेंस का टेंडर निकाला गया. पूरे मामले की जांच करने की मांग भी की.
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कर्मचारियों को दें 50 लाख की नुकसान भरपाई
चर्चा के दौरान बताया गया कि मनपा द्वारा संचालित कचरा संकलन कंपनियां एजी एन्वायरो और बीवीजी में कई कर्मचारी कार्यरत हैं जिनकी बीमा सुविधा बंद कर दी गई है. बदले में उन्हें केवल डेढ़ से 2 लाख का ही निजी बीमा दिया जा रहा है. बीमा कंपनियां कर्मचारियों को उपचार के दौरान हुआ खर्च देने से आनाकानी करती हैं. कर्मचारियों को लगातार 10 से 12 घंटा काम करना पड़ता है.
इतना लंबा समय गंदगी में रहने के कारण कर्मचारियों के स्वास्थ्य को खतरा रहता है. ऐसे में इन कर्मचारियों को 10 लाख रुपए का वैद्यकीय बीमा होना चाहिए. ड्यूटी पर रहते दौरान मृत्यु होने पर परिजनों को 50 लाख रुपए तुरंत नुकसान भरपाई के रूप में देने की मांग भी की. आंदोलन में सुरेश साखरे, दीपक कापसे, मुन्ना तिवारी, सुशील नायक, प्रीतम कापसे, शशिधर तिवारी, आशीष हाडगे, भूपेन्द्र कठाने, कार्तिक करोसिया, अंगद हीरौंदे, विक्की मिश्रा, नीलिमा शास्त्री आदि शामिल थे.
