बाघ का हमला (फाइल फोटो)
Deolapar Forest Department Protest: एक बार फिर मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटना सामने आई है। बाघ के हमले में एक की मौत के बाद ग्रामीणों के मन में भय और वन विभाग के प्रति रोष भड़का हुआ है। बता दें कि अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए खेतों में मेहनत करने वाली एक महिला की मंगलवार को बाघ के हमले में मौत हो गई।
रामटेक तालुका के पिपरिया गांव की रहने वाली 40 वर्षीय ललिता वाघारे शाम करीब 5.30 बजे खेत में काम कर रही थीं। तभी एक बाघ ने उन पर हमला कर अपना शिकार बना लिया। इस घटना से न केवल पिपरिया गांव बल्कि पूरा तालुका में शोक है। पिपरिया और उसके आसपास के खेत जंगल से सटे होने के कारण यहां जंगली जानवरों का खतरा कोई नई बात नहीं है।
ग्रामीणों का मानना है कि मंगलवार की घटना प्राकृतिक नहीं बल्कि प्रशासनिक लापरवाही के कारण हुई ‘हत्या’ है। ऐसी दिल दहला देने वाली घटना होने पर सरकार 25 लाख रुपये मुआवजा देकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेती है लेकिन सवाल यह है कि क्या इस राहत राशि से खोए हुए व्यक्ति को वापस लाया जा सकता है? क्या खून के रिश्तों का मूल्य केवल पैसों में ही आंका जाएगा?
दशकों से यह मांग चली आ रही है कि सरकार पहल करे और जंगलों से सटी कृषि भूमि पर सौर बाड़ या सुरक्षित बाड़ लगाने के लिए शतप्रतिशत सब्सिडी प्रदान करे। घटना के बाद अधिकारी केवल ‘जल्द ही उपाय करने’ का आश्वासन देकर चले जाते हैं। वास्तविकता में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जाती।
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मंगलवार को बाघ के हमले में ललिता की मौत के बाद ग्रामवासियों में रोष का माहौल है। इस घटना के बाद ग्रामवासियों ने आंदोलन का इशारा दिया है। बुधवार की सुबह 8 बजे बड़ी संख्या में ग्रामीणवासी वन विभाग के प्रति अपना रोष व्यक्त करने के लिए आरोग्य विभाग, देवलापार में आंदोलन और मोर्चा निकालेंगे। लोगों का कहना है कि जानवरों द्वारा इंसानों पर हमला किया जा रहा है और वन विभाग गहरी नींद में सोया हुआ है।