Krishna Khopde :पूर्व नागपुर में मतदाता सूची (सोर्सः सोशल मीडिया)
East Nagpur Elections: महानगरपालिका चुनाव में मतदान प्रतिशत का 50 प्रतिशत तक सिमट जाना प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। मतदाता सूची में भारी गड़बड़ियों के कारण पूर्व नागपुर में करीब 50,000 मतदाता मतदान से वंचित रह गए। यह सनसनीखेज आरोप भाजपा विधायक कृष्णा खोपड़े ने लगाया।
उन्होंने कहा कि पूर्व नागपुर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों में कांग्रेस का पूरी तरह सफाया हो चुका है और मनपा चुनाव में 99.99 प्रतिशत कांग्रेस पराजित हुई है। लकड़गंज जोन क्रमांक-8 में सभी 16 नगरसेवक भाजपा से चुने गए हैं, जबकि कांग्रेस एक भी सीट नहीं जीत सकी। यह जनादेश कांग्रेस के राजनीतिक अस्तित्व पर बड़ा प्रश्नचिन्ह है।
विधायक खोपड़े ने कहा कि प्रशासनिक त्रुटियों के कारण हजारों नागरिक संविधान प्रदत्त मतदान अधिकार से वंचित रह गए। महानगरपालिका प्रशासन द्वारा मतदाता सूची का समुचित अध्ययन न कर केवल आशा वर्करों पर निर्भर रहना, पूर्व नागपुर के सभी 10 प्रभागों में करीब 50,000 मतदाताओं के मतदान से वंचित रहने का मुख्य कारण बना। इसके लिए पूरी तरह मनपा प्रशासन जिम्मेदार है।
उन्होंने बताया कि मतदान केंद्रों की अव्यवस्थित स्थिति, अलग-अलग प्रभागों में मतदान केंद्र होना, मतदाता सूची का खंडित स्वरूप, सूची में नाम होने के बावजूद मतदान केंद्र की सूची में नाम न मिलना, तथा एक ही परिवार के सदस्यों के नाम अलग-अलग केंद्रों में दर्ज होने जैसी समस्याओं से मतदाता परेशान हुए।
खोपड़े ने सवाल उठाया कि वर्ष 2024 के विधानसभा चुनाव में पूर्व नागपुर में 2.48 लाख मतदाताओं ने मतदान किया था, जबकि मनपा चुनाव में यह संख्या घटकर 1.50 लाख से भी कम रह गई। यदि विधानसभा चुनाव की मतदाता सूची के आधार पर पर्याप्त मतदान केंद्र बनाए गए होते, तो मतदान प्रतिशत 80 प्रतिशत तक पहुंच सकता था। उन्होंने कहा कि यह गली-मोहल्ले का चुनाव था और मतदाता उत्साहित थे, लेकिन मतदाता सूची ही अविश्वसनीय साबित हुई।
विधायक खोपड़े ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेताओं ने पिछले 50 वर्षों तक पूर्व नागपुर को विकास से वंचित रखा। केंद्र और राज्य सरकारों के माध्यम से हुए अभूतपूर्व विकास कार्यों के चलते पूर्व नागपुर एक विकास मॉडल के रूप में उभरा है, जिससे कांग्रेस नेता असहज हो गए।
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उन्होंने आरोप लगाया कि चतुर्वेदी और वंजारी ने भ्रामक भाषण देकर मतदाताओं को गुमराह करने की कोशिश की, जिसे जनता ने सिरे से खारिज कर दिया। मनपा चुनाव के दौरान झूठे आरोप और खोखले वादों की बाढ़ लाई गई। खुले मंच पर बहस की चुनौती देने के बावजूद कोई कांग्रेस नेता सामने नहीं आया, जिससे उनके दावों की पोल खुल गई। खोपड़े ने वंजारी पर 2014 की हार के बाद 2019 और 2024 में जमानत जब्त होने के डर से टिकट न मांगने का आरोप लगाते हुए उन्हें राजनीतिक रूप से पलायनवादी करार दिया।