Project Tiger: बाघों का ‘विश्वगुरु’ बना भारत! टॉप 10 में मारी बाजी, जानें रूस और चीन से कितना आगे हैं देश
53 Years of Project Tiger: दुनिया के 75% बाघ अब भारत में! 1973 से 2026 तक की बड़ी उपलब्धि, लेकिन महाराष्ट्र में 187 बाघों की मौत ने बढ़ाई चिंता।
- Written By: प्रिया जैस
प्रोजेक्ट टाइगर (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Project Tiger 53 Years Celebration: बाघों का अवैध शिकार, आवास का विनाश और अन्य संकट ने नई दिल्ली में 1969 की आईयूसीएन महासभा में कार्रवाई को प्रेरित किया जिसमें बाघों की हत्या पर वैश्विक रोक लगाने का आह्वान किया गया। इसके बाद भारत ने बाघों की खाल के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया और जुलाई 1970 तक बाघों के शिकार पर पूर्ण प्रतिबंध लागू कर दिया। संरक्षण के क्षेत्र में यह बदलाव 1972 के वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम द्वारा पुष्ट हुआ।
18 नवंबर 1972 को भारतीय वन्यजीव बोर्ड ने आधिकारिक तौर पर रॉयल बंगाल टाइगर को भारत का नया राष्ट्रीय पशु घोषित किया जिसने एशियाई शेर का स्थान लिया। इस कदम से बाघ के सीमित आवास की तुलना में उनकी 16 राज्यों में उपस्थिति को उजागर किया गया जिसका उद्देश्य जागरूकता बढ़ाना और संरक्षण प्रयासों को मजबूत करना था।
1 अप्रैल, 1973 को ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ के शुभारंभ से इन प्रयासों को और बल मिला। 1 अप्रैल 2026 को प्रोजेक्ट टाइगर हो 53 वर्ष पूरे हो गए हैं। जैव विविधता के संरक्षण में एक शानदार प्रगति के साथ भारत ने विश्व में बाघों के सबसे बड़े गढ़ के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर ली है।
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वन्य आबादी का लगभग 75 प्रश
प्रोजेक्ट टाइगर की शुरुआत वर्ष 1973 में कॉर्बेट नेशनल पार्क से हुई थी। उस दौरान देश में बाघों की संख्या 1,827 थी और लगातार कम हो रही थी। प्रोजेक्ट टाइगर के सफल कार्यान्वयन से बाघों की संख्या वर्ष 2022 में 3,682 पहुंच गई जो वैश्विक वन्य आबादी का लगभग 75% है।
हालांकि वर्ष 2022 के बाद बाघों की आधिकारिक गणना नहीं हुई। मार्च 2026 तक हिमालय की तलहटी से लेकर पश्चिमी घाट तक फैले देश के 58 नामित बाघ अभयारण्य 84,000 वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में फैले हुए हैं, जो देश के भौगोलिक क्षेत्र के लगभग 2.3% हिस्से की रक्षा करते हैं।
- 1,827 बाघ थे वर्ष 1973 में
- 3,682 टाइगर वर्ष 2022 में
- 58 बाघ अभयारण्य शामिल
- 84,000 वर्ग किमी क्षेत्र में पहल
टाइगर कैपिटल ने गंवाए 40 बाघ
हालांकि प्रोजेक्ट टाइगर के सफल कार्यान्वयन से देश में बाघों की संख्या बढ़ी लेकिन अब बाघ संरक्षण पर वन विभाग गंभीर नहीं दिख रहा। गौर करें तो देश में सर्वाधिक बाघ महाराष्ट्र में हैं। बीते 5 वर्षों पर नजर डाले तो अकेले महाराष्ट्र में 187 बाघों की मौत हुई है।
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बाघों की मौत को मुख्य कारण दुर्घटनाएं और बिजली का करंट साबित हुई है। गौरतलब है कि टाइगर कैपिटल के नाम से चर्चित नागपुर ने 40 बाघ गंवा दिए। टाइगर कैपिटल में बाघों की इस तरह मौतें चिंता का विषय है। वर्ष 2023 में सर्वाधिक 52 बाघों की मौत हुई थी।
विश्व में बाघों की आबादी
| क्रमांक | देश | संख्या |
|---|---|---|
| 1 | भारत | 3,682 |
| 2 | रशिया | 500 |
| 3 | इंडोनेशिया | 393 |
| 4 | नेपाल | 355 |
| 5 | थाईलैंड | 168 |
| 6 | मलेशिया | 150 |
| 7 | बांग्लादेश | 114 |
| 8 | भूटान | 131 |
| 9 | चाइना | 60 |
| 10 | म्यांमार | 28 |
- नवभारत लाइव पर नागपुर से अभिषेक सिंह की रिपोर्ट
