नागपुर में विश्व शांति सरोवर में ब्रह्मा कुमारीज द्वारा आयोजित ‘एकता और विश्वास के जरिए महाराष्ट्र का सुनहरा दौर’ कार्यक्रम में मौजूद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्म व अन्य (सोर्स: सोशल मीडिया)
President Draupadi Murmu Nagpur Visit: महाराष्ट्र की यह वीर भूमि छत्रपति शिवाजी महाराज, महात्मा फुले और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर जैसे महापुरुषों की विरासत है जिन्होंने दुनिया को सामाजिक समरसता सिखाई। आज इसी भूमि से शुरू हो रहा एकता और विश्वास का यह अभियान केवल महाराष्ट्र ही नहीं बल्कि पूरे देश में ‘स्वर्ण युग’ के आगमन का मार्ग प्रशस्त करेगा। इन प्रेरक शब्दों के साथ महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नागपुर के विश्व शांति सरोवर में ब्रह्माकुमारीज के राज्यव्यापी अभियान का भव्य शुभारंभ किया।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि जब समाज नकारात्मकता को त्यागकर करुणा और परस्पर प्रेम के धागे में बंधता है तभी एक ‘विकसित भारत’ का सपना साकार होता है।
महाराष्ट्र देश में सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विकास के उदाहरण प्रस्तुत करता रहा है। यह पवित्र भूमि राष्ट्र-निर्माण की उन महान विचारधाराओं और आदर्शों की जन्मभूमि रही है, जिन्होंने भारतवासियों में नवचेतना का संचार किया।
महाराष्ट्र देश में सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विकास के उदाहरण प्रस्तुत करता रहा है। यह पवित्र भूमि राष्ट्र-निर्माण की उन महान विचारधाराओं और आदर्शों की जन्मभूमि रही है, जिन्होंने भारतवासियों में नवचेतना का संचार किया। pic.twitter.com/M2jSTIqFtr — President of India (@rashtrapatibhvn) February 25, 2026
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि महाराष्ट्र पूरे देश की प्रगति को शक्ति देता है। उद्योग, उद्यमिता, नवाचार और उच्च शिक्षा और अमुल्य सांस्कृतिक परंपराओं के बल पर महाराष्ट्र आत्मविश्वास से आगे बढ़ते हुए भारत के विकास का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। हमारा लक्ष्य ऐसे समग्र विकास की ओर बढ़ना है, जिसका लाभ हर नागरिक तक पहुंचे। इतिहास से प्रेरणा लेकर तथा आधुनिक तकनीक, कौशल-विकास और नवाचार की शक्ति का उपयोग करके एक अधिक सशक्त और समृद्ध महाराष्ट्र तथा भारत के निर्माण के लिए संकल्पबद्ध होकर कार्य करना होगा।
हमारा लक्ष्य ऐसे समग्र विकास की ओर बढ़ना है, जिसका लाभ हर नागरिक तक पहुँचे। इतिहास से प्रेरणा लेकर तथा आधुनिक तकनीक, कौशल-विकास और नवाचार की शक्ति का उपयोग करके एक अधिक सशक्त और समृद्ध महाराष्ट्र तथा भारत के निर्माण के लिए संकल्पबद्ध होकर कार्य करना होगा। pic.twitter.com/GRzrQ5rJRt — President of India (@rashtrapatibhvn) February 25, 2026
समारोह को संबोधित करते हुए महाराष्ट्र के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने एकता और विश्वास को एक दूसरे का पूरक बताया। उन्होंने कहा कि जिस समाज या राष्ट्र में अटूट विश्वास और एकजुटता होती है उसकी उन्नति को विश्व की कोई भी शक्ति नहीं रोक सकती। वेदों का हवाला देते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रेम और शांति ही भारतीय संस्कृति के मूल मंत्र है और ब्रह्माकुमारीज का यह कार्य पूरे विश्व के लिए प्रेरणापुंज है।
महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री एवं नागपुर जिले के पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने इस अभियान की सराहना करते हुए इसे राज्य की आध्यात्मिक प्रगति के लिए ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को तभी असली मजबूती मिलती है जब समाज जागरूक और नैतिक मूल्यों से लैस हो। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ‘मानवता को प्राथमिकता’ देने वाला यह उपक्रम विकसित महाराष्ट्र के निर्माण में मील का पत्थर साबित होगा।
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ब्रह्माकुमारीज संस्थान द्वारा इस राज्यव्यापी अभियान को महाराष्ट्र के प्रत्येक तालुका स्तर तक पहुंचाने के लिए 8 प्रमुख सिद्धांतों को निर्धारित किया गया है। इन सिद्धांतों का उद्देश्य समाज के हर व्यक्ति में सकारात्मक परिवर्तन लाना है। इसमें व्यसन मुक्त समाज का निर्माण और शाश्वत जीवन पद्धति, स्वच्छता के प्रति जागरूकता और नागरिक के रूप में कर्तव्यों का बोध, मानवता के प्रति कर्तव्य-तत्परता और मूल्य आधारित शिक्षा, निर्मल व संयमी जीवन-योग तथा सुसंवाद के माध्यम से खुशहाल जीवन के साथ हरित और शाश्वत महाराष्ट्र का संकल्प शामिल है। समारोह के दौरान ब्रह्माकुमारीज के अतिरिक्त महासचिव बीके मृत्युंजय ने इस व्यापक अभियान की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की। इस दौरान ब्रह्माकुमारीज नागपुर की प्रमुख रजनी दीदी और चंद्रिका दीदी मौजूद थीं।