किसान की बेटी ने CM से मांगा हक तो मिला हॉस्टल छोड़ने का नोटिस, विवाद बढ़ा तो प्रशासन को पीछे खींचने पड़े कदम
Savitribai Phule Hostel Nagpur: नागपुर के सावित्रीबाई फुले छात्रावास में कूलर की मांग करने वाली छात्रा आकांक्षा को मिला निष्कासन का नोटिस रद्द। जानें कैसे अंतत: प्रशासन ने घुटने टेके?
- Written By: गोरक्ष पोफली
छात्रावास व सीएम को एप्लिकेशन सौंपती छात्राएं (सोर्स: डिजाइन फोटो)
Nagpur Hostel Student Expulsion: नागपुर के सावित्रीबाई फुले छात्रावास में एक गरीब किसान परिवार की एमबीए प्रथम वर्ष की छात्रा आकांक्षा प्रकाश उके ने नागपुर की भीषण गर्मी में छात्रावास में कूलर जैसी बुनियादी सुविधा न होने की शिकायत सीधे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से की थी। मुख्यमंत्री ने इस शिकायत पर तत्काल संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई और विदर्भ के कन्या छात्रावासों के लिए लगभग 600 कूलर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
हॉस्टेल खाली करने का नोटिस
हालांकि, इस शिकायत के बाद छात्रावास प्रशासन ने छात्रा के प्रति सहयोगात्मक रवैया अपनाने के बजाय उसे कमरा खाली करने का नोटिस थमा दिया व कुल ₹22,498 की राशि का भुगन तुरंत करने कहा गया, जिसमें आवास और भोजन जैसे खर्च शामिल थे। । प्रशासन ने आरोप लगाया कि छात्रा नौकरी कर रही है, इसलिए उसे छात्रावास छोड़ना होगा। इसके जवाब में छात्रा ने स्पष्ट किया कि वह कोई नौकरी नहीं कर रही, बल्कि अपने पाठ्यक्रम के हिस्से के रूप में एक अनिवार्य इंटर्नशिप कर रही है, जिसके उसे शैक्षणिक अंक मिलते हैं।
छात्रा कर आरोप
छात्रा का आरोप था कि प्रशासन ने उस पर दबाव बनाने की कोशिश की और कहा कि उसे सीधे मुख्यमंत्री के पास जाने के बजाय समाज कल्याण विभाग में शिकायत करनी चाहिए थी। प्रशासन ने यहाँ तक कह दिया कि, यदि यहाँ नहीं रहना है, तो घर जाओ।
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आखिर नाेटिस रद्द
छात्रावास प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई के बाद, अंततः एमबीए प्रथम वर्ष की छात्रा आकांक्षा प्रकाश उके को छात्रावास से निकालने का नोटिस रद्द कर दिया गया है। समाज कल्याण विभाग ने इस संबंध में निर्णय लिया है, जिससे अब उसे छात्रावास में रहने की अनुमति मिल गई है। इससे पहले, प्रशासन ने उस पर नौकरी करने का आरोप लगाते हुए छात्रावास खाली करने का आदेश दिया था, जिसे छात्रा ने यह स्पष्ट करते हुए नकारा था कि वह केवल अपने पाठ्यक्रम का अनिवार्य हिस्सा इंटर्नशिप कर रही है। पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले द्वारा छात्रा को दिए गए आश्वासन और प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद, यह निष्कासन नोटिस वापस ले लिया गया, जिससे छात्रा को बड़ी राहत मिली है,।
पालक मंंत्री का प्रयास
नागपुर जिले के पालक मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने सावित्रीबाई फुले छात्रावास की पीड़ित छात्रा से व्यक्तिगत रूप से फोन पर संपर्क किया और उसे ढांढस (धीरज) बंधाया,। उन्होंने छात्रा को आश्वासन देते हुए कहा कि, घबराने की कोई जरूरत नहीं है। इसके साथ ही, बावनकुले ने छात्रा से वादा किया कि वे इस निष्कासन नोटिस के मामले में स्वयं प्रशासन से बात करेंगे और स्थिति को संभाल लेंगे,। उनके इसी हस्तक्षेप और आश्वासन के बाद समाज कल्याण विभाग ने छात्रा को निकालने का निर्णय वापस ले लिया।
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विजय वडेट्टीवार की नाराजगी
विजय वडेट्टीवार ने सावित्रीबाई फुले छात्रावास की इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे अत्यंत गंभीर बताया है। उन्होंने प्रशासन के रवैये की कड़ी निंदा की और कहा कि एक गरीब किसान परिवार की छात्रा द्वारा कूलर जैसी बुनियादी सुविधा की मांग करना और उसके लिए मुख्यमंत्री से शिकायत करना अपराध नहीं है। उन्होंने शिकायत के बाद छात्रा को निष्कासन नोटिस दिए जाने को लोकतांत्रिक व्यवस्था को कलंकित करने वाला कृत्य करार दिया।
उन्होंने प्रशासन की इस कार्रवाई को केवल एक गलती नहीं, बल्कि स्पष्ट प्रतिशोध की भावना बताया। उनके अनुसार, छात्रावास की असुविधाओं के खिलाफ आवाज उठाना और न्याय मांगना छात्रा का अधिकार है। वडेट्टीवार ने चेतावनी दी कि ऐसी घटनाओं से छात्रों के बीच डर का माहौल पैदा होता है और भविष्य में अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने की उनकी हिम्मत खत्म हो जाती है।
