नागपुर MLC : HC के रुख के बाद सरपंच-सदस्यों के मतदान अधिकार वाली जनहित याचिका वापस, कोर्ट ने किया निपटारा
Nagpur Local Body Elections: स्थानीय स्वराज्य संस्था चुनावों में सरपंचों और पंचायत प्रतिनिधियों को मतदान अधिकार नहीं देने के खिलाफ दायर जनहित याचिका हाई कोर्ट में वापस ले ली गई।
- Written By: अंकिता पटेल
विधान परिषद चुनाव, प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: सौजन्य AI)
Maharashtra Legislative Council: नागपुर महाराष्ट्र विधान परिषद के स्थानीय स्वराज्य संस्था चुनावों में ग्राम पंचायत के सरपंचों, ग्राम पंचायत सदस्यों और पंचायत समिति सदस्यों को मतदान के अधिकार से वंचित रखने के खिलाफ गौतम मोरे ने हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की।
मंगलवार को याचिका पर सुनवाई के बाद जनहित याचिका के लिए निर्धारित नियम और शर्तों के अनुसार याचिका नहीं होने के संकेत दिए जाने के बाद याचिकाकर्ता की ओर से अंततः याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी गई जिसे स्वीकार कर न्यायाधीश अनिल किलोर और न्यायाधीश राज वाकोडे ने याचिका का निपटारा कर दिया। याचिका में महाराष्ट्र की मौजूदा चुनाव प्रणाली को असंवैधानिक और ग्रामीण लोकतंत्र के प्रतिनिधियों के साथ घोर अन्याय बताया गया।
कर्नाटक और तेलंगाना में है अधिकार
याचिकाकर्ता ने याचिका में एक बड़ा सवाल उठाते हुए स्पष्ट किया है कि कर्नाटक और तेलंगाना जैसे राज्यों में ग्राम पंचायत के सरपंचों और पंचायत समिति के सदस्यों को स्थानीय निकाय चुनाव क्षेत्रों में मतदान करने का अधिकार प्राप्त है। ऐसे में महाराष्ट्र में इन जमीनी प्रतिनिधियों को इस अधिकार से दूर रखना पूरी तरह से भेदभावपूर्ण और अन्यायपूर्ण रवैया है।
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स्वयं को संविधान का अध्ययनकर्ता बताते हुए उन्होंने कहा कि एक सामान्य नागरिक होने के नाते उन्हें लगता है कि संविधान के संशोधन के अनुसार लागू हुई पंचायत राज प्रणाली के आधार पर सरपंचों और ग्राम पंचायत सदस्यों को अधिकार मिलना चाहिए।
संविधान की मूल भावना का उल्लंघन
अदालत के समक्ष रखे गए मुख्य बिंदुओं में याचिकाकर्ता ने बताया है कि ग्राम पंचायत के प्रतिनिधियों को अन्य स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं से अलग मानना पूरी तरह से गलत है। यह मौजूदा व्यवस्था चुनाव प्रक्रिया में समान प्रतिनिधित्व के मौलिक अधिकार का हनन करती है।
इसके जरिए ग्रामीण लोकतंत्र के प्रतिनिधियों को अनुचित तरीके से चुनाव प्रक्रिया से बाहर रखा गया है। यह पाबंदी भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), 38, 40 और 73वें संविधान संशोधन के उद्देश्यों व संविधान की मूल आत्मा के खिलाफ है,
पूर्व में किए गए प्रयास पूरी तरह रहे विफल
याचिका में इस बात का भी जिक्र किया गया है कि हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाने से पहले ग्राम पंचायत और पंचायत समिति द्वारा संबंधित अधिकारियों को इस संबंध में पत्र लिखे गए थे। हालांकि इन पत्राचारों का कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकला जिसके कारण अंततः यह जनहित याचिका दायर करनी पड़ी।
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सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता का मानना था कि महाराष्ट्र की ग्रामीण राजनीति और पंचायत प्रतिनिधियों के लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर यदि अदालत के माध्यम से ऐसे आदेश होते हैं तो निश्चित ही मजबूत स्थिति होगी। कोर्ट का मानना था कि तर्क भले ही सही हो लेकिन जनहित याचिका के लिए कुछ नियम और शर्तें हैं जिनके दायरे से बाहर जाकर अधिकारों का उपयोग नहीं हो सकता है।
