कुपोषण के खिलाफ नागपुर जिला परिषद की महा-मुहिम; अब सरकारी अधिकारी गोद लेंगे कुपोषित बच्चे, खुद रखेंगे हर अपडेट

Nagpur Zilla Parishad: नागपुर जिले में कुपोषण से निपटने के लिए जिला परिषद ने नई पहल शुरू की है। अधिकारी 176 गंभीर कुपोषित बच्चों को गोद लेकर उनकी नियमित निगरानी और देखभाल करेंगे।
Nagpur Zilla Parishad's mega-campaign against malnutrition; government officials to adopt malnourished children and personally track every update.
सीईओ विनायक महामुनि, (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Nagpur Child Welfare: नागपुर जिले में कुपोषण की समस्या को कम करने के लिए जिला परिषद द्वारा कुपोषित बच्चों को गोद लेने की एक विशेष पहल शुरू की जा रही है जिसके तहत अधिकारी कुपोषित बच्चों की जिम्मेदारी संभालेंगे और अपनी निगरानी में रखेंगे। महिला व बाल कल्याण विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, जिले में 176 गंभीर कुपोषित बच्चे हैं।

इन बच्चों को इस योजना के तहत गोद लिया जाएगा। प्रत्येक प्रकल्प अधिकारी को 2 बच्चों तथा विस्तार अधिकारी और पर्यवेक्षक को 1-1 बच्चे की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। इसके अलावा मुख्यालय के अधिकारी भी बच्चों की जिम्मेदारी संभालेंगे। संबंधित अधिकारी नियमित रूप से आंगनवाड़ी केंद्रों का दौरा कर बच्चों की स्थिति की निगरानी करेंगे। समय-समय पर उनकी देखभाल का जायजा लिया जाएगा तथा उन्हें उपहार भी दिए जाएंगे।

सीईओ महामुनि की संकल्पना

कुपोषित बच्चों को गोद लेने की योजना सीईओ विनायक महामुनि ने तैयार की है। बताते चले कि कुपोषण कम करने के लिए सरकार द्वारा अनेक योजनाएं और कार्यक्रम संचालित किए जाते हैं। बच्चों को विभिन्न प्रकार का पौष्टिक आहार भी उपलब्ध कराया जाता है तथा उनकी हर महीने स्वास्थ्य जांच की जाती है। बावजूद इसके कुपोषण की दर अपेक्षित स्तर तक कम होती दिखाई नहीं दे रही है।

नागपुर जिला परिषद द्वारा अत्यंत गंभीर रूप से कम वजन वाले बच्चों के लिए आआंगनवाडी सेविकाओं को प्रति बच्चे 30 रुपये का अतिरिक्त भत्ता दिया जा रहा है। विभाग का दावा है कि इस पहल के सकारात्मक परिणाम देखने को मिले हैं। जिला परिषद का लक्ष्य जिले में कुपोषण की स्थिति को 'जीरो' तक लाना है। इसी उद्देश्य से अब कुपोषित बच्चों को गोद लेने की योजना शुरू की जा रही है।

जिले से कुपोषण को पूरी तरह समाप्त करने का प्रयास किया जा रहा है। सीईओ विनायक महामुनि ने कुपोषित बच्चों को गोद लेने की योजना तैयार की है। इसके तहत अधिकारियों को बच्चों की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। जिन अधिकारियों को यह जिम्मेदारी दी जाएगी, वे बच्चों की देखभाल और प्रगति पर विशेष ध्यान देंगे।

- महिला एवं बाल कल्याण विभाग, डिप्टी सीईओ, कैलास घोडके

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