
पुरानी पेंशन योजना का लाभ (सौजन्यः सोशल मीडिया)
Bombay High Court Verdict: हाई कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा दायर रिट याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें एक कर्मचारी को पुरानी पेंशन योजना का लाभ देने के ट्रिब्यूनल के फैसले को चुनौती दी गई थी। राज्य सरकार ने 14 जुलाई 2022 को ट्रिब्यूनल के फैसले की वैधता और औचित्य पर सवाल उठाया था, जो डॉ. आशीष मनोहरराव महाले द्वारा दायर किया गया था।
ट्रिब्यूनल ने अपने फैसले में डॉ. महाले के पक्ष में निर्णय देते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वे पेंशन लाभों के लिए उनकी सेवा की गणना उनकी प्रारंभिक नियुक्ति की तारीख, यानी 30 सितंबर 1999 से करें और उनकी सेवाओं को नियमित सेवा के रूप में मानें। इसके साथ ही ट्रिब्यूनल ने कहा कि डॉ. महाले को पुरानी पेंशन योजना के सभी लाभ दिए जाएँ।
ट्रिब्यूनल ने कहा कि डॉ. महाले को राष्ट्र संत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय में रीडर के रूप में नियुक्त किया गया था, जो सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त पद है। वह 2009 में रीडर के पद पर शामिल होने के बाद भी निरंतर सेवा में थे। उन्हें बाद में 11 मई 2011 के कार्यालय आदेश के अनुसार प्रोफेसर के पद पर स्थायी किया गया।
ट्रिब्यूनल ने यह भी कहा कि डॉ. महाले की पूरी सेवा सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज में व्याख्याता और लक्ष्मी नारायण प्रौद्योगिकी संस्थान में रीडर के रूप में रही। उनकी सेवाओं को पहले भी ट्रिब्यूनल और हाई कोर्ट द्वारा संरक्षित किया गया था।
ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया कि डॉ. महाले 1999 से तीन साल से अधिक समय तक सेवा में थे और इसलिए वह 28 फरवरी 2017 के जी.आर. के मद्देनजर इसी तरह की राहत के हकदार हैं। पहले के फैसलों में हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को इसी तरह के कर्मचारियों की सेवाओं को नियमित करने का निर्देश दिया था, जिन्होंने तकनीकी ब्रेक के साथ तीन साल की सेवा पूरी की थी और उनकी सेवाओं को 9 दिसंबर 2021 के जी.आर. अनुसार नियमित किया गया।
ट्रिब्यूनल ने जोर दिया कि राज्य को समान रूप से स्थित कर्मचारियों के साथ समान व्यवहार करना चाहिए। साथ ही सुप्रीम कोर्ट के एक सिद्धांत का हवाला दिया कि जब अदालत कर्मचारियों के एक विशेष समूह को राहत देती है, तो अन्य समान रूप से स्थित कर्मचारियों को भी इसी लाभ का विस्तार कर समान रूप से लाभ दिया जाना चाहिए।
ये भी पढ़े:सीमेंट कंक्रीट सड़क दो दिन में ही टूटी, घटिया सामग्री के उपयोग का आरोप
हाई कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने ट्रिब्यूनल द्वारा दिए गए निष्कर्षों की जांच की है और उन्हें उचित और सही पाया है। न्यायालय ने यह भी नोट किया कि प्रतिवादी के पक्ष में मूल आवेदन को अनुमति देने और राहत देने में कोई विकृति नहीं पाई गई। कोर्ट ने याचिका में कोई योग्यता नहीं होने का हवाला देते हुए इसे खारिज कर दिया।






