नागपुर और देश के टाइगर रिजर्व का कड़वा सच; विस्थापन की कछुआ चाल से कोर एरिया तैयार करने में आ रही बड़ी बाधा
Nagpur NTCA Strides 2026: NTCA की स्ट्राइड्स 2026 रिपोर्ट के अनुसार देश के टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्रों से अब तक केवल 28% गांवों का विस्थापन हुआ है, जबकि 72% गांव अब भी जंगल के भीतर बसे हैं।
- Written By: अंकिता पटेल
बाघ संरक्षण, टाइगर रिजर्व, एनटीसीए, प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: एआई फोटो )
Nagpur NTCA Strides 2026 Tiger Reserve: नागपुर में बाघों के लिए सुरक्षित और मानवीय हस्तक्षेप से मुक्त ‘कोर एरिया’ तैयार करने की मुहिम को कई दशक बीत जाने के बाद भी बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। ‘राष्ट्रीय व्याघ्र संरक्षण प्राधिकरण’ (एनटीसीए) की नवीनतम रिपोर्ट ‘स्ट्राइड्स 2026’ के अनुसार देश के टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्रों से अब तक केवल 28 प्रतिशत गांवों का ही सफलतापूर्वक विस्थापन हो पाया है, जबकि 72 प्रतिशत गांव आज भी जंगलों के भीतर बसे हुए हैं।
आंकड़ों में हकीकत
रिपोर्ट के अनुसार देश के अधिसूचित टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में कुल 1,040 गांव स्थित थे। इनमें से अब तक 298 गांवों और 32,198 परिवारों का ही विस्थापन हो सका है। चिंताजनक बात यह है कि अभी भी 742 गांव (लगभग 72 प्रतिशत) और करीब 97,786 परिवार जंगलों के कोर क्षेत्र में ही रह रहे हैं। हालांकि देश के 18 टाइगर रिजर्व को पूरी तरह से मानव-मुक्त करने में सफलता मिली है लेकिन अभी भी 40 रिजर्व ऐसे हैं जहां मानवीय बस्तियां मौजूद हैं।
किन राज्यों के सामने है बड़ी चुनौती
रिपोर्ट में उन राज्यों का भी उल्लेख है जहां विस्थापन की गति धीमी है। तेलंगाना के अमराबाद टाइगर रिजर्व में सबसे अधिक 61 गांव और लगभग 20,435 परिवार कोर एरिया में रह रहे हैं। इसी तरह राजस्थान के रणथंभौर में 60 गांव, छत्तीसगढ़ के इंद्रावती में 56 और उदंती-सीतानदी में 51 गांव अभी भी स्थानांतरण की प्रतीक्षा कर रहे हैं। दक्षिण भारत के अनामलाई और सत्यमंगलम टाइगर रिजर्व में भी यही स्थिति बनी हुई है।
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कानूनी प्रक्रिया : वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि बाघों के सुरक्षित प्रजनन और उनके बेहतर संरक्षण के लिए हर टाइगर रिजर्व में कम से कम 800 से 1,200 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र मानवीय गतिविधियों से पूरी तरह मुक्त होना आवश्यक है। एनटीसीए के अनुसार, यह पुनर्वास प्रक्रिया पूरी तरह से स्वैच्छिक है जो ‘वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972’ और ‘वन अधिकार अधिनियम 2006 के तहत ग्राम सभाओं की सहमति से की जाती है।
महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश का प्रदर्शन
पुनर्वास कार्य में मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र अन्य राज्यों की तुलना में आगे
मध्यप्रदेश: ‘वीरांगना दुर्गावती’ टाइगर रिजर्व 43 गांवों (5,701 परिवार) के पुनर्वास के साथ पहले स्थान पर है। इसके बाद कान्हा (37) गांव) और सतपुड़ा (36 गांव) का स्थान आता है।
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महाराष्ट्र: राज्य ने भी सराहनीय काम किया है। ‘सह्याद्री’ टाइगर रिजर्व से 29 गांवों के 2,056 परिवारों और ‘मेलघाट’ से 25 गांवों के 4,711 परिवारों का सफलतापूर्वक पुनर्वास किया गया है।
