सह्याद्रि टाइगर कॉरिडोर पर बवाल: 550 गांवों के अस्तित्व पर संकट, पालकमंत्री आबिटकर ने दिए कड़े निर्देश

Sahyadri Tiger Reserve News: सह्याद्रि टाइगर कॉरिडोर के नए सीमांकन से कोल्हापुर और आसपास के 550 गांवों पर पाबंदी का खतरा मंडरा रहा है। विरोध के बाद पालकमंत्री ने प्रस्ताव पर रोक लगाने के निर्देश दिए।
Sahyadri Tiger Corridor Controversy
बाघ (फाइल फोटो, सोर्स: सोशल मीडिया)
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Sahyadri Tiger Corridor Controversy: सह्याद्रि टाइगर रिजर्व के तहत प्रस्तावित नए टाइगर कॉरिडोर को लेकर विवाद बढ़ता दिखाई दे रहा है। स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों को विश्वास में लिए बिना लिए गए इस फैसले को कोल्हापुर जिले के पालकमंत्री प्रकाश आबिटकर ने अन्यायकारक करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि वन्यजीव विभाग का यह नया सीमांकन स्थानीय लोगों के विकास में सबसे बड़ी बाधा बनेगा। यह प्रस्ताव दो साल पहले मंजूरी के लिए केंद्र सरकार को भेजा गया था।

काेल्हापुर जिले के पालकमंत्री प्रकाश आबिटकर ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वन्यजीव विभाग के प्रस्तावित कॉरिडोर के संबंध में स्थानीय जनता और चुने हुए प्रतिनिधियों के विचारों को तुरंत वन विभाग और भारत सरकार के संबंधित मंत्रालय तक पहुंचाया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि उनका इरादा इस प्रस्ताव पर राज्य के मुख्यमंत्री और वन मंत्री के समक्ष औपचारिक रूप से अपनी आपत्ति दर्ज कराने का है।

काेल्हापुर जिले के 550 से अधिक गांवों पर प्रतिबंध?

पालकमंत्री आबिटकर ने इस बात पर जोर दिया कि सह्याद्रि टाइगर कॉरिडोर परियोजना से कोल्हापुर जिले और पड़ोसी जिलों के लगभग 550 से अधिक गांवों पर असर पड़ेगा। इससे उन किसानों की मुश्किलें और बढ़ जाएंगी जो पहले से ही जंगली जानवरों के आतंक से परेशान हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रशासन का यह कर्तव्य है कि वह किसी भी परियोजना को लागू करते समय स्थानीय निवासियों को प्रक्रिया में शामिल करे और उनसे परामर्श करे। इस महत्वपूर्ण बैठक में उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों में सांसद शाहू छत्रपति, सांसद धैर्यशील माने, विधायक विनय कोरे, विधायक शिवाजी पाटिल, जिला कलेक्टर डॉ. विजय राठौड़, मुख्य वन संरक्षक (क्षेत्रीय, कोल्हापुर) श्रीमती श्रीलक्ष्मी अन्नाबखुला, और उप वन संरक्षक धैर्यशील पाटिल, आदि शामिल थे।

परियोजना की खामियों को उजागर करना

विधायक विनय कोरे ने कहा कि सह्याद्रि टाइगर रिजर्व के नए सीमांकन के संबंध में एक औपचारिक प्रस्ताव पारित करना और उसे संबंधित विभाग को सौंपना अनिवार्य है। मौजूदा कार्यप्रणाली पर अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए विधायक शिवाजी पाटिल ने टिप्पणी की कि जनता के बीच इस समय डर का माहौल है, जिसका कारण यह है कि परियोजना से संबंधित जानकारी को गुप्त रखा गया है। उन्होंने सुझाव दिया कि वन विभाग को स्थानीय निवासियों के हितों की रक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए और, केवल प्रतिबंध लगाने के बजाय, सह-अस्तित्व की भावना को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

स्थानीय वास्तविकताओं पर विचार करने की आवश्यकता

पालकमंत्री आबिटकर ने आगे कहा कि परियोजनाओं को लागू करते समय पारदर्शिता सर्वोपरि है और बिना किसी पूर्व परामर्श या सूचना के निर्णय लेना लोकतांत्रिक सिद्धांतों के विपरीत है। इस दूरदराज के क्षेत्र में रहने वाले लोगों का जीवन पहले से ही संघर्षों से भरा है। प्रस्तावित नया कॉरिडोर उनके दैनिक जीवन और मौलिक अधिकारों पर कड़ी पाबंदियां लगाएगा।

बैठक में मौजूद सांसद शाहू छत्रपति ने नागरिकों के अधिकारों के हनन को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की। इसी तरह, सांसद धैर्यशील माने ने परियोजना के तकनीकी डिजाइन और भौगोलिक दायरे के संबंध में सवाल उठाए। स्थानीय लोगों में व्याप्त असंतोष को ध्यान में रखते हुए, उन्होंने ज़ोरदार मांग की कि प्रशासन केवल खाका तैयार करने के बजाय जमीनी वास्तविकताओं पर उचित विचार करे। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि विकास प्रक्रिया में स्थानीय निवासियों की भागीदारी अनिवार्य है, और उनके हितों के विपरीत कोई भी निर्णय उन पर थोपा नहीं जाना चाहिए।

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