अजित पवार के निधन पर अनिल देशमुख (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Anil Deshmukh Condolence Meet: उपमुख्यमंत्री अजित पवार के विमान दुर्घटना में मौत के बाद से राज्य की राजनीति में अलग ही मोड़ आ गया है। मविआ के सहयोगी दलों द्वारा इस हादसे पर षड्यंत्र का संदेह व्यक्त करते हुए जांच की मांग की जा रही है। राकां शरद पवार गुट के आला नेता 9 फरवरी के बाद दुर्घटना को लेकर रहस्य खोलने के वक्तव्य दे रहे हैं। शहर में दोनों गुटों के बीच भीतरी राजनीति शुरू हो गई है।
अजित पवार राकां के दोनों ही गुटों के कार्यकर्ताओं के लिए प्रिय थे और उनके आकस्मिक निधन से सभी पर दुखों का पहाड़ टूटा है। जो उनके करीबी थे उन्हें अपनी जमीन भी खिसकती नजर आ रही थी। उनके सामने सबसे बड़ा सवाल था कि अब आगे क्या। वे किसके नेतृत्व में कार्य करेंगे, उनको सुनने वाला कौन होगा।
इसका समाधान भी जल्द ही हो गया। अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार को नेतृत्व की जिम्मेदारी दे दी गई। इससे कार्यकर्ताओं का कन्फ्यूजन तो दूर हो गया लेकिन अभी भी स्थानीय कार्यकर्ताओं में यहां हो रहे कुछ घटनाक्रमों को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
अजित पवार के निधन की खबर फैलते ही राकां के दोनों गुटों के कार्यकर्ताओं ने एक साथ मिलकर पार्टी कार्यालय में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया था लेकिन उसके कुछ दिनों के बाद ही शरद पवार गुट के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख ने सर्वदलीय जनप्रतिनिधियों की एक शोकसभा आयोजित की जिसमें सभी राजनीतिक दलों के स्थानीय नेता, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
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इसके बाद से ही अजित पवार गुट के कुछ पदाधिकारी व कार्यकर्ता दबी जबान यह सवाल उठाने लगे हैं कि मूल पार्टी तो अजित पवार की है जिसका चुनाव चिन्ह भी घड़ी है। ऐसे में स्थानीय संगठन के मुख्य पदाधिकारियों ने सर्वदलीय शोक सभा का आयोजन क्यों नहीं किया। कुछ तो यह भी संदेह जता रहे हैं कि क्या शरद पवार गुट द्वारा स्थानीय पदाधिकारियों पर दबाव डालते हुए यह संकेत देने का प्रयास किया गया है।
या फिर गाहे-बगाहे दोनों पार्टियों का विलय होगा, इसलिए संभल जाओ। क्या कोई षड्यंत्र चल रहा है। पूर्व गृह मंत्री ने भी अजित दादा के विमान दुर्घटना को लेकर उनकी तेरहवीं के बाद विस्तार से खुलासा करने की बात मीडिया से कही थी। कोई भी खुलकर बोलने को तैयार नहीं है लेकिन वे यह जरूर मान रहे हैं, कुछ तो चल रहा है जो जल्द सामने आएगा।