प्रभाग क्रमांक 6 में निधि में भेदभाव, फिर भी हुआ विकास कार्य, बसपा ने लगाया आरोप
Nagpur Municipal Fund Inequality: नागपुर प्रभाग 6 में विकास निधि में भेदभाव के आरोप, बसपा पूर्व पार्षदों का संघर्ष और आगामी चुनाव में चौरंगी मुकाबले की स्थिति का विश्लेषण।
- Written By: आंचल लोखंडे
प्रभाग क्रमांक 6 में निधि में भेदभाव (सौजन्यः सोशल मीडिया)
Nagpur Election: आसीनगर जोन के प्रभाग 6 में वर्ष 2017 के चुनाव में बसपा का दबदबा रहा। कांग्रेस और भाजपा का यहां कोई पूर्व पार्षद नहीं था। इसी कारण विकास निधि वितरण में भेदभाव होने का आरोप बसपा के पूर्व पार्षद जितेंद्र घोडेस्वार लगाते रहे हैं। चारों पूर्व पार्षदों का कहना है कि निधि मिलने में कठिनाई जरूर रही, लेकिन संघर्ष के बाद मूलभूत सुविधाओं के लिए कुछ बजट मिल सका। हालांकि, पश्चिमी क्षेत्रों की तुलना में यहां शिक्षा, स्वास्थ्य, सांस्कृतिक भवन, युवाओं के लिए खेल के मैदान और ई-लाइब्रेरी जैसी सुविधाएं विकसित नहीं हो सकीं।
पूर्व पार्षदों के अनुसार भाजपा शासित मनपा और राज्य-केन्द्र सरकार की ओर से भाजपा पार्षदों को अधिक प्रकल्प मिले, जबकि उत्तर नागपुर की उपेक्षा की गई। आने वाले 5 वर्षों में शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक और सांस्कृतिक विकास पर विशेष ध्यान देने का लक्ष्य है।
सेवा-सुविधाओं की जर्जर स्थिति
कांग्रेस के निकटतम प्रतिद्वंद्वी इरशाद शेख ने कहा कई क्षेत्रों में 30-40 वर्ष पुरानी सीवर लाइनें, आए दिन सीवरेज ओवरफ्लो से गंदगी, अंग्रेजी माध्यम स्कूल का निर्माण डेढ़ वर्ष से अधूरा, युवाओं के लिए खेल मैदान नहीं,झोपड़पट्टीधारकों को अब तक पट्टे नहीं, म्हाडा कॉलोनी की रजिस्ट्री लंबित है। उनका आरोप है कि भाजपा सत्ता वाली मनपा में अन्यायपूर्ण रूप से एकतरफा निधि दी जाती है। जोनल कार्यालय में फाइल गायब हो जाती है और मुख्यालय में निधि न होने का बहाना मिलता है।
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पूर्व पार्षदों का आरोप
- 15 वर्षों की भाजपा सत्ता में उत्तर नागपुर की उपेक्षा
- सीमेंट रोड प्रकल्पों में भी क्षेत्र को केवल 10% लाभ
- विकास के कार्य मुख्य रूप से विधायक नितिन राऊत की निधि से
- कांग्रेस और विशेषकर युवक कांग्रेस लगातार सक्रिय रही है।
- मुस्लिम लीग के असलम खान को छोड़कर अन्य प्रत्याशी जनता मुद्दों पर उतने सक्रिय नहीं रहे।
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चौरंगी मुकाबला-हर वोट की कीमत
इस प्रभाग में पिछले चुनावों की तरह इस बार भी चतुष्कोणीय मुकाबले की संभावना है। सभी दलों को बराबर वोट मिलने से शह-मात की रोचक स्थिति बनती रही है।
