सुई नहीं, अब सांस से होगी डायबिटीज की जांच, नागपुर यूनिवर्सिटी का नया आविष्कार, UK पेटेंट का मिला सम्मान
Nagpur University Research: नागपुर यूनिवर्सिटी का कमाल। अब सुई नहीं, सांस से होगी डायबिटीज की जांच। यूके डिजाइन रजिस्ट्रेशन प्राप्त इस 'नॉन-इनवेसिव' डिवाइस ने चिकित्सा जगत में मचाई हलचल।
- Written By: प्रिया जैस
नॉन-इनवेसिव डायबिटीज मॉनिटरिंग डिवाइस (सौजन्य-नवभारत)
Nagpur University Invention: मधुमेह (डायबिटीज) जांच के पारंपरिक तरीकों को बदलने वाला एक बड़ा नवाचार सामने आया है। राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय के प्राणीशास्त्र विभाग के शोधकर्ताओं ने ऐसा उपकरण विकसित किया है, जिससे अब सुई के बजाय सांस के जरिए डायबिटीज की जांच संभव होगी।
इस ‘नॉन-इनवेसिव डायबिटीज मॉनिटरिंग डिवाइस’ को यूके डिजाइन रजिस्ट्रेशन का प्रमाणपत्र भी प्राप्त हुआ है, जो इस शोध की वैश्विक मान्यता को दर्शाता है। अब तक डायबिटीज की जांच के लिए रक्त का नमूना लेना अनिवार्य होता है, लेकिन इस नए उपकरण के जरिए सांस के विश्लेषण से ही रक्त में ग्लूकोज का स्तर मापा जा सकेगा।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त
यह तकनीक पूरी तरह सुई रहित है। मरीजों के लिए सुरक्षित, सुविधाजनक और आरामदायक नियमित जांच कराने वालों के लिए बड़ी राहत है। विभाग द्वारा विकसित इस उपकरण को यूके डिजाइन रजिस्ट्रेशन मिलने से यह शोध अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त कर चुका है।
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इस उपकरण की अवधारणा पहले आविष्कार अनुसंधान महोत्सव- 2024 में प्रस्तुत की गई थी, जहां हर्ष तिवारी के प्रोजेक्ट को नवाचार के लिए सम्मानित किया गया था। अब यह तकनीक आगे बढ़ते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच गई है।
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कैलिब्रेशन व वैलिडेशन प्रक्रिया जारी
इस परियोजना में प्रमुख रूप से डॉ. वर्षा धुर्वे (विभाग प्रमुख), हर्ष तिवारी, सबरीन बानो, मोहम्मद जावेद मंसूरी के अलावा कई संस्थानों के विशेषज्ञों ने योगदान दिया, जिनमें बालाघाट, नागपुर, अमरावती और आयरलैंड के शोधकर्ता शामिल हैं।
फिलहाल यह उपकरण सफलतापूर्वक विकसित हो चुका है और इसकी सटीकता व व्यावहारिक उपयोगिता बढ़ाने के लिए कैलिब्रेशन और वैलिडेशन प्रक्रिया जारी है। यह शोध न केवल चिकित्सा क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव ला सकता है, बल्कि भविष्य में डायबिटीज मरीजों के लिए जांच को आसान, किफायती और दर्द रहित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
