नागपुर शीत सत्र: अधिकारियों की अलग ही कसरत, मुंबईया अमले की व्यवस्था में जुटे
Nagpur Winter Session: नागपुर शीत सत्र के दौरान मुंबईया अमले की मेहमाननवाज़ी के लिए स्थानीय अधिकारी दिन-रात जुटे है। होटलों से लेकर सैर-सपाटे तक की खास तैयारियां पूरी हो गई है।
- Written By: आंचल लोखंडे
शीत सत्र : अधिकारियों की अलग ही कसरत (सोजन्यः सोशल मीडिया)
Nagpur News: उपराजधानी अपनी सरकार के स्वागत के लिए पूरी तरह तैयार की जा रही है। लगभग 12 दिनों तक सरकार यहां डेरा डालेगी। इस दौरान मुंबई के आला कर्मचारियों और मंत्रालयीन अमले को किसी तरह की असुविधा न हो, इसकी जिम्मेदारी स्थानीय विभागों के अधिकारियों पर है। कोई अधिकारी यह नहीं चाहेगा कि कहीं कोई कमी रह जाए और सरकार नाराज होकर जाए। इसी कारण हर विभाग अपने-अपने स्तर पर मुंबईया अमले को प्रसन्न करने के लिए तैयारियों में जुटा हुआ है। एक मलाईदार विभाग के वरिष्ठ कर्मी बताते हैं कि “साहब ने खर्च का इंतज़ाम शुरू कर दिया है। ठेकेदारों को भी साफ कह दिया गया है।अभी सेवा करो, बाद में मेवा मिलेगा।”
मंत्रियों, विधायकों के साथ ही मंत्रालयीन अधिकारियों और कर्मचारियों के रहने व भोजन की व्यवस्था सरकारी बंगलों, क्वार्टर्स आदि में की गई है। तैयारियाँ अंतिम चरण में हैं।
सरकार ने बीते वर्ष निर्देश जारी किए थे कि अधिकारी और कर्मचारी उन्हें आवंटित आवास में ही रहेंगे, लेकिन इसके बावजूद मुंबईया अधिकारी बड़े होटलों को ही प्राथमिकता देते हैं। इस बार भी कुछ होटलों में बाहरी नामों से कमरे बुक करवाए गए हैं, ताकि बाद में कोई अड़चन न आए।
सैर-सपाटे की भी तैयारी
मुंबई से आने वाले अधिकारियों, मंत्रियों के स्टाफ और कर्मचारियों के लिए सप्ताहांत (शनिवार-रविवार) को आसपास के पिकनिक स्पॉट, वाइल्डलाइफ सफारी और दर्शनीय स्थलों की सैर करवाई जाती है। सरकार की ओर से इस खर्च के लिए कोई निधि नहीं मिलती, इसलिए यह खर्च स्थानीय स्तर पर ही जुटाया जाता है। अधिकारी अपनी “पावर” और “अंडरस्टैंडिंग” का इस्तेमाल करते हुए संबंधित ठेकेदारों से सारी व्यवस्था करवाते हैं। सूत्रों के मुताबिक अधिकांश रिज़ॉर्ट व सफारी बुक किए जा चुके हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के फ़ार्म हाउस तक पर पिकनिक कार्यक्रम तय हो चुके हैं।
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स्टेपलर से लेकर पेन तक… सब कुछ तैयार
एक विभागीय कर्मचारी ने बताया कि कामकाज के दौरान लगने वाली छोटी से छोटी सामग्री।स्टेपलर, आलपिन, कागज, स्टेशनरी।तक की व्यवस्था भी स्थानीय स्तर पर ही करनी पड़ती है। यदि जरा-सी भी कमी रह जाए, तो मुंबईया स्टाफ डांट-फटकार लगाने में देर नहीं करता, मानो वही सरकार हो।
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जिन कर्मचारियों की ड्यूटी किसी साहब के बंगले पर लगा दी जाती है, उनकी दिन-रात की नींद उड़ जाती है। कई बार उन्हें बेतुकी मांगों को भी पूरा करना पड़ता है।बाहर का स्पेशल भोजन, मनपसंद ब्रांड के टावल, और ज़रा सी बात पर लताड़… सब सामान्य बात है।
दशकों से कहा जाता रहा है कि मुंबईया सरकार शीत सत्र के बहाने नागपुर में “पिकनिक” मनाने आती है। विकेंड पर यह बात खुलकर दिखाई भी देती है। ऊपरी व्यवस्थाओं के लिए स्थानीय अधिकारियों को “ऊपरी कसरत” करनी पड़ती है।यह सिलसिला आज भी जस का तस जारी है।
