शालार्थ आईडी घोटाला (फाइल फोटो)
Teacher Recruitment Fraud Maharashtra: मार्च 2025 से रुके हुए वेतन को शालार्थ पोर्टल के माध्यम से नियमित करने की मांग करते हुए सायली हिरेखन और अन्य शिक्षकों ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की। याचिका पर सुनवाई के दौरान शिक्षा विभाग ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया जिसमें निदेशक द्वारा प्रस्तुत हलफनामे के अनुसार विभाग के पास लगभग 632 शिक्षकों और कर्मचारियों के मूल अभिलेख (रिकॉर्ड) उपलब्ध नहीं होने की जानकारी उजागर हुई।
जांच में उजागर हुआ है कि ये ‘शालार्थ आईडी’ बिना किसी वैध मंजूरी और नियमों का उल्लंघन करके तैयार किए गए थे। नागपुर विभाग के वेतन पथक (प्राथमिक) के अधीक्षक और कुछ विशिष्ट व्यक्तियों ने स्कूलों के मुख्याध्यापकों के साथ मिलीभगत कर इन फर्जी आईडी को सिस्टम में शामिल किया। हैरानी की बात यह है कि इसके लिए सक्षम प्राधिकारी के पास कोई मंजूरी प्रस्ताव तक नहीं भेजा गया था।
शिक्षा निदेशक (योजना), पुणे द्वारा की गई जांच में पाया गया कि कई नियुक्तियां ऐसे पदों पर की गई थीं जो या तो विभाग द्वारा मंजूर नहीं थे या मूल रूप से अस्तित्व में ही नहीं थे। रिकॉर्ड गायब होने के कारण इन 632 कर्मचारियों की वैधता पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। विभाग ने अदालत को सूचित किया है कि केवल 6 उच्च पदस्थ अधिकारियों को छोड़कर वर्तमान में किसी अन्य का वेतन नहीं रोका गया है।
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शिक्षा विभाग ने अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा है कि याचिकाकर्ताओं की मूल नियुक्ति ही ‘आरंभ से रद्द’ है क्योंकि इसमें भर्ती प्रक्रिया और सरकारी नियमों का उल्लंघन किया गया है। विभाग के अनुसार, धोखाधड़ी के माध्यम से प्राप्त की गई ‘शालार्थ आईडी’ उन्हें वेतन का कोई कानूनी अधिकार प्रदान नहीं करती है। सरकार ने साफ कर दिया है कि यदि इन शिक्षकों ने स्कूलों में कार्य किया है तो उनके वेतन के भुगतान की पूरी जिम्मेदारी संबंधित स्कूल प्रबंधन की होगी, सरकार की नहीं है।