ड्रोन और GPS के बावजूद नहीं थमा अवैध उत्खनन, नागपुर में रेत माफिया हावी; महंगी रेत से जनता परेशान
Nagpur Illegal Sand Mining: नागपुर में रेत की कीमतें बढ़ीं और माफिया सक्रिय हैं। डिजिटल सिस्टम के बावजूद अवैध उत्खनन से सरकार को करोड़ों का नुकसान हो रहा है।
- Written By: अंकिता पटेल
नागपुर रेत माफिया( सोर्स: सोशल मीडिया )
Sand Price Hike Maharashtra: नागपुर एक ओर आम नागरिक रेत के लिए तरस रहे हैं और उन्हें मिल भी रही है तो इतनी महंगी कि आंखों से पानी निकल आए। सरकार ने नागरिकों को सस्ती रेत दिलाने के लिए कई सुधारात्मक कदम उठाए, रेत उत्खनन से लेकर कुलाई तक पूरे सिस्टम को ऑनलाइन यानी डिजिटल किया लेकिन रेत की डिजिटल ढुलाई में माफियाओं का वायरस इस कदर घुस गया है कि सरकार को ही करोड़ों रुपयों के राजस्व का चुना लगाया जा रहा है, अपने सिस्टम में सरकारी नुमाइंदे ही सिंडिकेट बनाकर सेंध लगा रहे हैं।
राज्य के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने पूरे राज्यभर में इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट पर जोर दिया है और विकास कार्यों के लिए लगने वाले सबसे अहम गौण खनिज पर माफिया अपना फन फैलाए उसे ग्रसित किए हुए है।
रेत के अवैध उत्खनन और परिवहन से मालामाल हो रहे माफियाओं का राज खत्म करने के लिए रेत घाटों की ड्रोन से निगरानी, परिवहन करने वाले वाहनों पर जीपीएस सिस्टम, रेत घाट से गंतव्य तक पहुंचाने तक लिए वीटीएस यानी व्हीकल ट्रेकिंग सिस्टम तक शुरू किया गया लेकिन इस पूरे सिस्टम पर भी माफिया ने सेंध लगा रखी है।
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हर गाड़ी बुलढाना ही क्यों जाती है
नागपुर जिले के करीब 50 रेत घाटों में जितने भी शुरू है उनमें रोजाना लगभग कम से कम 400-500 गाड़ियां लीड होती हैं और सारी गाड़ियों बुलढाना और चिखली ही जाती है।
सूत्रों की मानें तो हकीकत में ये नागपुर शहर व आसपास ही बेची जाती है लेकिन जांच किया जाए तो खुलासा होगा कि चिखली में इतनी रेत बेचा जाना दिखाया जा रहा है जिससे दूसरे नये विखली का निर्माण हो जाए।
घाट से निकलते ही गाड़ियों का जीपीएस सिस्टम बंद कर दिया जाता है। इस पूरे सिस्टम की जांच की जाए तो डिजिटल सिस्टम को संचालित करने वाली कंपनी और संबंधित विभागों के भ्रष्ट अधिकारियों, रेत माफिया के सिंडिकेट का भांडा फूट सकता है।
निकलने की एंट्री, डिलीवरी का पता नहीं
रेत घाट से ट्रक की लोडिंग से ही रायल्टी जनरेट हो रही है लेकिन टर्मिनेट नहीं हो रहा मतलब डिलीवरी कहां की जा रही इसका पता ही नहीं चल रहा है, जबकि लोडिंग से अनलोडिग तक की निगरानी के लिए सरकार ने पुणे की एक कंपनी को ठेका दिया हुआ है जिसकी जिम्मेदारी घाटों से रेत की चोरी रोकने, ड्रोन से निगरानी करने के साथ ही ओवरलोड वाहनों की जांच कर रेत माफियाओं पर नकेल कसने की है।
सूत्रों ने बताया कि यह कंपनी ही रेत माफियाओं, संबंधित विभागों के भ्रष्ट तंत्र से मिलीभगत कर घाट से गाड़ी निकलने व गंतव्य तक पहुंचने के रूट में पड़ने वाले हर शहर, तहसील के खनिकर्म विभाग, पुलिस, आरटीओ, राजस्व विभाग के एसडीओ, तहसीलदार आदि अधिकारियों को सेट कर सरकार को राजस्व का चूना लगाने में लिप्त है।
वीटीएस सिस्टम ऐसा है कि जैसे ही कोई वाहन घाट पर पहुंचता है, संबंधित सारे अधिकारियों को अलर्ट मिल जाता है। अगर दिनभर में घाट में 100 गाडियां पहुंची तो सारी जानकारी ऑटोमेटिक मिल जाती है लेकिन 20-22 रायल्टी ही जनरेट की जाती है।
एसडीओ का काम जितनी गाड़ियों का अलर्ट मिला उसकी जांच करना होता है लेकिन कोई बैंक ही नहीं कर रहा। मतलब 80 फीसदी रेत सीधे चोरी की जा रही है।
‘नागापुर’ की रायल्टी से ‘गेम’
सूत्र ने बताया कि बुलढाना जिले के खामगांव तहसील स्थित ‘नागापुर’ रेत घाट की एक रायल्टी से नागपुर’ के रेत घाटी से 10-10 ट्रिप लगाकर करोड़ों का गेम हो रहा है। एक रायल्टी 22 घंटे तक जिंदा (वैच) रहती है। ‘नागापुर यहां से लगभग 260 किमी की दूरी पर है और 6 घंटे नागपुर आने में लगते हैं।
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अगर नागपुर के आसपास की तहसीलों व अन्य शहरों में रेत बेची गई तो समय और अधिक लगता है, “नागपुर’ की एक रायल्टी लेकर माफिया नागपुर के घाटी से अवैध रूप से रेत लोड करते हैं और कामती, नागपुर शहर में बेचते है। 22 घंटे में इस एक रायल्टी से 10 से 11 ट्रिप एक वाहन लगा लेता है, इतने बड़े पैमाने पर रेत की चोरी सारे सिस्टम को चता बताते हुए मिलीभगत से की जा रही है।
