नागपुर मनपा चुनाव: नजरअंदाज किया तो…आठवले का भाजपा को अल्टीमेटम, सीटों में मांगा अपना हिस्सा
Maharashtra Local Body Elections: रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले) ने नागपुर मनपा चुनाव में भाजपा को 10 सीटों का अल्टीमेटम दिया, नजरअंदाज किया तो गठबंधन बदलने की चेतावनी।
- Written By: प्रिया जैस
रामदास आठवले (सौजन्य-IANS)
Republican Party of India: पिछले 14 वर्षों से देश और महाराष्ट्र में भाजपा के साथ मजबूती से खड़ी रहने वाली रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले गुट) ने इस बार नागपुर महानगरपालिका चुनाव में अपनी उपेक्षा के खिलाफ कड़े तेवर दिखाए हैं। पार्टी ने महायुति के तहत भाजपा से 10 सीटों की स्पष्ट मांग की है।
बुधवार को रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया के एक प्रतिनिधि मंडल ने भाजपा शहराध्यक्ष दयाशंकर तिवारी से मुलाकात की और संभावित उम्मीदवारों के नामों की सूची सौंपी। इस सूची में प्रभाग 35 और प्रभाग 38 जैसे प्रमुख क्षेत्रों की सीटें शामिल हैं।
सिर्फ नीले झंडे का इस्तेमाल न करे भाजपा
रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया के स्थानीय नेताओं का आरोप है कि भाजपा हर चुनाव में उन्हें साथ तो रखती है लेकिन जब बात टिकट वितरण की आती है तो उन्हें नजरअंदाज कर दिया जाता है। पार्टी पदाधिकारियों का कहना है कि भाजपा केवल गठबंधन में नीला झंडा दिखाकर दलित वोट हासिल करती रही है लेकिन अब हमें सम्मानजनक सीटें चाहिए। रामदास आठवले ने हमेशा केंद्र में मोदी सरकार का साथ दिया है, अब स्थानीय स्तर पर भाजपा को अपना फर्ज निभाना चाहिए।
सम्बंधित ख़बरें
महाराष्ट्र में मंत्रियों के ‘हवाई सफर पर ब्रेक’; सीएम फडणवीस की अनुमति के बिना नहीं उड़ेगा विमान
गुमशुदगी की रिपोर्ट के बाद होटल में मिला कारोबारी का शव, पुणे के स्वारगेट में मचा हड़कंप
अमरावती में मातम: घातखेड़ा तालाब में डूबे 4 मासूमों का गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार, एक साथ उठीं चार अर्थियां
अर्थव्यवस्था अंदर से खोखली, युद्ध तो बस बहाना; राज ठाकरे ने खोला पीएम मोदी की अपील का ‘कच्चा चिट्ठा’
यह भी पढ़ें – नागपुर मनपा चुनाव: भाजपा अपने दम पर, महायुति लगभग टूटी! बैठक केवल औपचारिकता
बगावत के संकेत
रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया ने साफ कर दिया है कि यदि भाजपा उन्हें इस बार भी सीटें नहीं देती है तो वह महायुति के अन्य 2 दलों (शिवसेना शिंदे गुट) और राष्ट्रवादी कांग्रेस (अजित पवार गुट)) के साथ मिलकर चुनाव लड़ने पर विचार करेगी। यह भाजपा के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है क्योंकि दलित वोटों का बिखराव महायुति के गणित को बिगाड़ सकता है।
