मनपा चुनाव में महायुति और रिपब्लिकन पार्टी एक साथ, रामदास आठवले का बड़ा ऐलान, ठाकरे बंधु बड़ी वजह

Maharashtra Assembly Winter Session: केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने नागपुर में घोषणा की कि रिपब्लिकन पार्टी आगामी मनपा चुनाव महायुति के साथ लड़ेगी, 19 महानगर पालिकाओं में गठबंधन तय।
Maharashtra Assembly Winter Session: केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने नागपुर में घोषणा की कि रिपब्लिकन पार्टी आगामी मनपा चुनाव महायुति के साथ लड़ेगी, 19 महानगर पालिकाओं में गठबंधन तय।
रामदास आठवले (सौजन्य-सोशल मीडिया)
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Maharashtra Local Body Elections: शीत सत्र के दौरान शनिवार को केंद्रीय सामाजिक न्याय राज्य मंत्री रामदास आठवले विधान भवन परिसर पहुंचे। अपने अनोखे अंदाज में उन्होंने ठाकरे बंधुओं पर हमला करते हुए कहा कि ‘मी आज विधीमंडळाचा मारलाय फेरफटका, कारण मला द्यायचा आहे ठाकरेबंधूंना झटका (मैं आज विधानभवन इसलिए आया क्योंकि मुझे ठाकरे बंधुओं को झटका देना है)।’

उन्होंने परिसर में मीडिया से आगामी महानगर पालिका चुनाव महायुति के साथ लड़ने सहित अनेक मुद्दों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि नागपुर हमारी उपराजधानी है। अधिवेशन नागपुर और विदर्भ के विकास पर चर्चा करने के लिए होता है। रिपब्लिकन पार्टी महायुति में शामिल है। आगामी महानगर पालिका चुनाव में एकत्र चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है।

महायुति के साथ लड़ेंगे चुनाव

नगर परिषद चुनाव में एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़े लेकिन अब मनपा चुनाव में एकत्र आएंगे। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री द्वय एकनाथ शिंदे-अजीत पवार और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण के साथ चर्चा हुई है। चर्चा के अनुसार रिपब्लिकन पार्टी 19 महानगर पालिकाओं में साथ में चुनाव लड़ेगी। इसमें पार्टी के उम्मीदवारों को योग्य हिस्सेदारी मिलनी चाहिए।

पार्टी ने मांगी सीटें

रिपब्लिकन पार्टी की ताकत अनेक शहरों में है। पार्टी ने मुंबई में 15 से 16 और नागपुर में 7 से 8 जगह की मांग की है। राज्य विधि मंडल के दोनों सभागृह में विरोधी पक्ष नेता पद रिक्त होने के मुद्दे पर कहा कि विरोधी पक्ष नेता संख्या बल के आधार पर तय किया जाता है। वर्तमान में महाविकास आघाड़ी के पास संख्या बल नहीं है। इस वजह से विरोधी पक्ष नेता पद का निर्णय अध्यक्ष द्वारा नियमानुरूप करना चाहिए।

सभागृह में विरोधी पक्ष नेता होना ही चाहिए। उन्होंने कहा कि विदर्भ पृथक होना चाहिए। यह हमारी पुरानी मांग है। 1 मई, 1960 को महाराष्ट्र का गठन हुआ था। उस वक्त विदर्भ के लिए दिये गये आश्वासनों की पूर्ति नहीं हुई है। यदि पृथक विदर्भ चाहिए तो फिर तेलंगाना की तरह आंदोलन को मजबूत बनाना होगा।