Nagpur News: नागपुर में दिखा आसमान का चमत्कार, सूरज के चारों ओर चमका ‘सन-हेलो’, जानिए इसका विज्ञान
सन हेलो एक अद्भुत और दुर्लभ घटना है। जो कभी-कभी दिखाई देता है। ये तब बनता है जब आसमान के सबसे ऊपर मौजूद सिरस बादल से सूरज की रौशनी सीधे रिफ्लेक्ट होकर आती है। इसे मौसम बदलने का संकेत माना जाता है।
- Written By: अक्षय साहू
नागपुर में दिखा 'सन-हेलो'
नागपुर: महाराष्ट्र के नागपुर में गुरुवार (21 मई) को आसमान में सूरज के चारों तरफ एक बड़ा सा गोला नजर आया। विज्ञान की भाषा में इसे ‘सन-हेलो’ कहा जाता है। यह एक अद्भुत और दुर्लभ घटना है। इसके चलते लोगों के बीच यह चर्चा का विषय बना हुआ है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर हेलो क्या है और यह कैसे बनता है? इसके बनने के पीछे का विज्ञान क्या है?
नागपुर के आसमान में गुरुवार को सूरज के चारों ओर दिखने वाले चमकदार, गोलाकार इंद्रधनुषी आकार को सन हेलो कहते हैं। यह एक वायुमंडलीय ऑप्टिकल घटना है, जो आमतौर पर 22 डिग्री के कोण पर सूरज को घेरे हुए दिखाई देती है। इसलिए इसे 22 डिग्री हेलो भी कहा जाता है। यह हवा में मौजूद बर्फ के क्रिस्टलों पर निर्भर करता है।
क्या है इसके पीछे का विज्ञान
माना जाता है कि, जब आसमान में बहुत ऊंचाई पर मौजूद सिरस बादल बनतें हैं। ये बादल पतले और सफेद बादल होते हैं और बर्फ के क्रिस्टल से बने होते हैं। ये बादल आमतौर पर आकाश में बहुत ऊँचाई (15,000 से 30,000 फीट तक) पर बनते हैं। इन क्रिस्टलों का आकार हेक्सागोनल होता है। ये क्रिस्टल सूरज की रोशनी को अपवर्तित और परावर्तित करते हैं। ऐसे में जब सूर्य की रोशनी इनसे गुजरती है, तो यह 22 डिग्री के कोण पर मुड़ता है, जिससे सूरज के चारों ओर एक हल्का इंद्रधनुष जैसा घेरा बनता है। इसे ही सन हेलो कहा जाता है जो देखने में काफी शानदार होता है।
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क्यों होता है सन हेलो खास?
सन हेलो एक दुर्लभ और अद्भुत वैज्ञानिक घटना है। नागपुर में दिखाई दिया यह दृश्य न केवल वहां के लोगों के लिए एक मजेदार पल था, बल्कि यह लोगों को बताता है कि प्रकृति के पास आज भी बहुत से चमत्कार छुपे हुए हैं, जिससे वह हमें हैरान कर सकता है।
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इसके अलावा, सन हेलो साल में कभी-कभी ही नजर आने वाली घटना है। आमतौर पर यह तब दिखाई देता है जब वायुमंडल में हाई-लेवल की नमी हो और सिरस बादल मौजूद हों। यह घटना गर्मी के जाने और मानसून की शुरुआत से पहले ज्यादा देखने को मिलते हैं। सन हेलो खुद में कोई खतरा नहीं है, लेकिन कभी-कभी यह मौसम बदलने का संकेत माना जाता है।
