नागपुर विज्ञापन (सोर्स-सोशल मीडिया)
Nagpur Municipal Corporation News: नागपुर महानगरपालिका ने शहर में विज्ञापनों के माध्यम से राजस्व बढ़ाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। प्रशासन ने होर्डिंग्स, स्काई-साइन और डिजिटल विज्ञापनों पर लगने वाले शुल्क में बड़ी वृद्धि का प्रस्ताव तैयार किया। मनपा प्रशासन का मानना है कि वर्तमान विज्ञापन व्यवसाय की आर्थिक स्थिति को देखते हुए मौजूदा लाइसेंस शुल्क बेहद कम है।
उल्लेखनीय है कि मंगलवार को होने जा रही स्थायी समिति की बैठक में इस प्रस्ताव को रखा जाना है जहां इसे मंजूरी मिलने की भी संभावना है। चूंकि यह नीतिगत मामला है, अतः स्थायी समिति की मंजूरी के बाद इसे सदन के विचारार्थ भी रखा जा सकता है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ‘सिटीजन फॉर इक्वालिटी’ बनाम नागपुर महानगरपालिका मामले में हाई कोर्ट की नागपुर बेंच के निर्देशों के बाद प्रशासन ने यह निर्णय लिया है। हाई कोर्ट ने 2001 की विज्ञापन नीति और 2022 के नियमों के बीच विरोधाभास पर सवाल उठाए थे। इस कानूनी उलझन और फुटपाथों, नालों व गॉट्री पर विज्ञापनों की निविदाएं रद्द होने के कारण मनपा को लगभग 505।99 लाख रुपये के राजस्व का भारी नुकसान उठाना पड़ा है।
पुराने विवाद और फडणवीस का हस्तक्षेप इससे पहले, नागपुर एडवरटाइजर्स एसोसिएशन ने तत्कालीन उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से नई दरों पर रोक लगाने की गुहार लगाई थी। फडणवीस के निर्देश पर प्रशासन ने नई दरों को स्थगित कर पुरानी दरों (जैसे नॉन-इल्यूमिनेटेड के लिए मात्र 22 रुपये) के आधार पर वसूली जारी रखी थी। 1 अप्रैल 2023 से वसूले गए अतिरिक्त शुल्क को भी भविष्य के भुगतानों में समायोजित करने का निर्णय लिया गया था।
आकाश चिह्न व विज्ञापन विभाग के अनुसार, इन नए नियमों का उद्देश्य न केवल राजस्व बढ़ाना है बल्कि नागपुर शहर में अवैध रूप से लगे होर्डिंग्स और विज्ञापनों पर लगाम लगाना भी है।
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