नागपुर में RSS मुख्यालय मार्च पर रोक, प्रकाश अंबेडकर का ‘जन आक्रोश’ मोर्चा क्यों बना बड़ा मुद्दा?

Nagpur Protest News: नागपुर में संविधान चौक से संघ मुख्यालय की ओर बढ़ रहे कांग्रेस और वंचित बहुजन आघाड़ी के मोर्चे को पुलिस ने बीच में ही रोका। एड. प्रकाश आंबेडकर ने सरकार पर तीखा हमला बोला।
Police stopped the Janakrosh Morcha led by VBA and Congress in Nagpur before reaching RSS HQ. Prakash Ambedkar challenged the PM over international issues and 'Epstein files'.
प्रकाश आंबेडकर (फोटो- सोशल मीडिया)
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Nagpur Janakrosh Morcha News: नागपुर वंचित बहुजन आघाड़ी और कांग्रेस द्वारा निकाले गए जनाक्रोश मोर्चे को सोमवार को पुलिस ने संघ मुख्यालय पहुंचने से पहले ही रोक दिया। दोनों दलों ने संविधान चौक से महल स्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) मुख्यालय तक मार्च का ऐलान किया था लेकिन पुलिस ने केवल मॉरिस वाई पॉइंट तक ही अनुमति दी थी। इसके बावजूद कार्यकर्ताओं ने आगे बढ़ने की कोशिश की जिन्हें पुलिस ने सख्ती से रोक दिया।

अंततः कार्यकर्ताओं को पीछे हटना पड़ा। पूरे इलाके में कड़ा पुलिस बंदोबस्त तैनात रहा।सभा को संबोधित करते हुए वंचित बहुजन आघाड़ी के अध्यक्ष एड. प्रकाश आंबेडकर ने 'एपस्टीन फाइल्स' और अमेरिका के साथ हुए करार के खिलाफ देशभर में आंदोलन छेड़ने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि हर जिले में मोर्चे निकाले जाएंगे। आंबेडकर और कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने प्रधानमंत्री और आरएसएस पर तीखा हमला बोला।

आंबेडकर ने कहा कि कनाडा जैसे छोटे देश भी दबाव में नहीं आते तो भारत क्यों झुके? इस दौरान कांग्रेस शहर अध्यक्ष विधायक विकास ठाकरे, विधायक साजिद खान पठान, सुजात आंबेडकर, अशोक सोनोन, कुशल मेश्राम, पिंकी शेख, उत्कर्षा रूपवते, भाकपा के सुभाष लांडे, कुंदा राऊत, अवंतिका लेकुरवाडे, जिलाध्यक्ष अश्विन बैस, अमित भुईगल ने सभा को संबोधित किया। मंच पर पूर्व मंत्री अनीस अहमद, कांग्रेस के प्रदेश महासचिव सुरेश भोयर, अतुल कोटेचा समेत कांग्रेस व वंचित बहुजन आघाड़ी के पदाधिकारी व कार्यकर्ता उपस्थित थे। प्रस्तावना डॉ. धैर्यवर्धन पुंडकर ने रखी। संचालन राजेंद्र पाटोले ने किया और अनिरुद्ध मडके ने आभार माना।

दिल्ली बने आंदोलन का केंद्र

आंबेडकर ने कांग्रेस से अपील की कि इस मुद्दे पर आंदोलन का केंद्र दिल्ली बनाया जाए। उन्होंने दावा किया कि यदि लाखों लोग सड़कों पर उतरते हैं तो प्रधानमंत्री को जवाब देना पड़ेगा और आगामी चुनावों में इसका असर दिखेगा।

जहाजों को छुड़ाने की चुनौती

आंबेडकर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चुनौती देते हुए कहा कि यदि उनमें साहस है तो ईरान के होर्मुज क्षेत्र में फंसे भारतीय नागरिकों के जहाजों को सुरक्षित वापस लाएं।

क्या संविधान और तिरंगे से डरते हैं?

सरसंघचालक को संविधान और तिरंगा झंडा सौंपने का हमारा इरादा था लेकिन वे सुबह की फ्लाइट से दिल्ली रवाना हो गए। संविधान और तिरंगे से क्या डर लगता है? यह सवाल सपकाल ने किया। उन्होंने कहा कि हम अभद्र भाषा या गालीगलौज करने नहीं आए थे। हम तो संवाद के लिए आए थे। हमें उम्मीद थी कि हमारे आने पर आप हमें भोजन के लिए पूछेंगे? हम भी इसी देश के नागरिक हैं। क्या अब आपका प्रभाव भाजपा पर भी नहीं रहा? यह भी सवाल भी सपकाल ने उठाया।

नारेबाजी और कांग्रेस की कम सहभागिता

मोर्चे के दौरान 'नाम नरेंद्र, काम सरेंडर', 'जय भीम' जैसे नारों से क्षेत्र गूंज उठा। कार्यकर्ता पीएम और आरएसएस के खिलाफ तख्तियां लेकर सड़को पर उतरे। हालांकि वंचित की तुलना में कांग्रेस कार्यकर्ताओं की उपस्थिति अपेक्षाकृत कम रही। मोर्चा रोके जाने के बाद हुई सभा में आआंबेडकर ने सभी कार्यकर्ताओं से शांतिपूर्वक घर लौटने की अपील की। पूरे संविधान चौक, टेकड़ी रोड और संघ मुख्यालय के आसपास भारी पुलिस बल तैनात था।

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