

Nagpur Travels Bus Rule Violation: नागपुर कार्यालय प्रतिनिधि, शहर की यातायात व्यवस्था बिगाड़ने में सबसे बड़ी भूमिका सवारी वाहनों की है। थी सीटर ऑटो और ई-रिक्शा चालक तो वैसे भी पुलिस को कुछ नहीं समझते लेकिन जिस तरह से ट्रैवल्स वाहन शहर के भीतर मनमानी कर रही है, देखकर लगता है कि उनके आगे पुलिस का बस नहीं चलता।
यह समझ से परे है कि आखिर ट्रैफिक पुलिस किस दबाव में काम कर रही है। सामान्य नागरिकों के वाहनों पर दनादन चालान कार्रवाई करने वाली ट्रैफिक पुलिस निजी बसों के आगे नतमस्तक क्यों हो जाती है।
शहर के हर मुख्य मार्ग पर ट्रैवल्स बस चालक नियमों की धज्जियां उड़ाते सामान्य नागरिकों को तो दिखते हैं लेकिन पुलिस को नहीं। या फिर मनमानी सहन करने के पीछे कोई बड़ी वजह है।
आम नागरिकों पर इस तरह कार्रवाई की जाती है कि मानो कोई बड़ा अपराध कर लिया हो, वहीं ट्रैवल्स बस चालकों के लिए खुद पुलिस नियम बनाती है और अपने ही नियम पालन कराने में पसीना छूट जाता है। ट्रैवल्स एजेंट के कार्यालय कुकरमुत्ते की तरह बढ़ते जा रहे हैं।
शहर से रोजाना 1600 से ज्यादा ट्रैवल्स बसों का आवागमन होता है। उमरेड रोड से गड़चिरोली, ब्रम्हपुरी, वर्धा रोड से चंद्रपुर, वर्धा और यवतमाल, कामठी रोड से जबलपुर-इंदौर, भंडारा रोड से गोंदिया और छत्तीसगढ़, वहीं कोराडी रोड से छिंदवाड़ा और बैतूल की बसें जाती हैं।
बसों का यह आंकड़ा खुद पुलिस विभाग का है। संभावना इससे ज्यादा बसों की भी है। भले ही ट्रैवल्स संचालकों की आपस में प्रतिस्पर्धा हो लेकिन जब बात पुलिस की सख्ती की होती है तो पूरी लॉबी इकट्ठा हो जाती है।
ऐसा लगने लगा है कि ट्रैवल्स बसों की लॉबी अब पुलिस पर हावी हो गई है। बैठकों में आला अधिकारियों द्वारा साफ निर्देश दिए जाने के बाद भी इस लॉबी को कोई फर्क नहीं पड़ता।
वर्धा रोड पर रेडीसन ब्ल्यू होटल और स्नेहनगर टर्निंग पर दिनभर ट्रैवल्स बसों का रेला लगता है। बीच सड़क पर बसे रोककर सवारी भरने और उतारने का काम किया जाता है।
अब स्वाभाविक सी बात है कि बसों से उतरने वाली सवारियों ऑटो और ई-रिक्शा में ही अपने गंतव्य तक पहुंचेगी, इसीलिए ऑटो और ई-रिक्शा का जमावड़ा होता है।
सवारी वाहन रास्ते पर खड़े होने के बावजूद सोनेगांव ट्रैफिक जोन के कर्मचारी को दिखाई नहीं देते। वहीं पार्किंग जोन में खड़े वाहनों को केवल इसीलिए टारगेट किया जाता है कि वाहन लाइन से 6 इंच बाहर है।
सबसे बड़ी बात ये कि कर्मचारी नियमों के विरुद्ध जाकर अपने मोबाइल का इस्तेमाल कर रहा था, जबकि पुलिस कमिश्नर के साफ निर्देश है कि कोई भी कार्रवाई पुलिस अपने निजी फोन से नहीं कर सकती, आखिर ट्रैवल्स यस, ऑटो और ई-रिक्शा चालकों से इतनी गहरी दोस्ती का कारण क्या है।
पिछले कुछ समय में अचानक ही यशवंत स्टेडियम परिसर में ट्रैवल्स बसों के कार्यालयों की भरमार हो गई है। शहर में बस स्टॉप निर्धारित करने का काम महानगरपालिका और ट्रैफिक पुलिस का है।
जब दोनों ही विभाग ने यहां बस अहे को अनुमति नहीं दी है तो फिर ट्रैवल्स का जमावड़ा हो कैसे रहा है। किसकी साठगांठ से यह काम चल रहा है यह भी जांच का विषय है।
यशवंत स्टेडियम धरिसर में कहीं भी बसों को पार्क करने की जगह नहीं है। सभी बसें रास्तों पर ही खड़ी रहती है, फिर पुलिस को ये सब क्यों दिखाई नहीं देता।