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सोलर सिटी के नाम पर केवल 3 जोन में पैनल; 7 मंजिला मुख्यालय पर भी बिजली का भारी खर्च, आखिर क्यों?
- Written By: प्रिया जैस
Nagpur NMC Electricity Bill: नागपुर मनपा के बिजली विभाग पर भ्रष्टाचार के आरोप। सोलर सिटी प्रोजेक्ट ठप, साल भर में 30 करोड़ का बिजली बिल और रखरखाव पर लाखों का खर्च।

सोलप सिटी (सौजन्य-सोशल मीडिया, कंसेप्ट फोटो)
NMC Electricity Department Scam: राज्य सरकार ने लगभग एक दशक पूर्व उपराजधानी को सोलर सिटी के रूप में परिवर्तित करने की मंशा जताई थी जिसके लिए केंद्र सरकार की ओर से वित्तीय मदद देने को मंजूरी भी प्रदान की गई किंतु मनपा के बिजली विभाग के अधिकारियों की लापरवाह कार्यप्रणाली का आलम यह रहा कि यह प्रकल्प पूरा नहीं हो पाया।
आलम यह है कि अब बिजली बिल के भुगतान पर ही महानगरपालिका को प्रति वर्ष 30 करोड़ से अधिक का भुगतान करना पड़ रहा है। यहां तक कि मनपा के बिजली विभाग की ओर से स्ट्रीट लाइटों के रखरखाव पर लगभग 1 करोड़ रुपए खर्च किया जा रहा है।
जबकि कुओं पर लगे वाटर पंप के रखरखाव पर 40 लाख रुपए के करीब का खर्च हो रहा है। इस तरह से केवल रखरखाव पर खर्च कर ठेकेदारों की जेब भरे जाने पर अब विपक्ष द्वारा आपत्ति दर्ज की जा रही है।
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चेकर्स ही नहीं तो कैसे पता करते हैं बंद स्ट्रीट लाइट
विभाग के अधिकारियों की ही मानें तो बिजली विभाग के पास कर्मचारियों की कमी है। आश्चर्यजनक यह है कि विभाग द्वारा स्ट्रीट लाइटों का रखरखाव तो निजी कंपनी द्वारा किया जाता है किंतु स्ट्रीट लाइट बंद हैं या नहीं, इसकी जानकारी जोन के माध्यम से रखी जाती है जिसके लिए चेकर्स का होना जरूरी है।
आलम यह है कि मनपा के बिजली विभाग के पास जोन में चेकर्स ही नहीं हैं, फिर भी विभाग द्वारा हर माह कहां पर कितने स्ट्रीट लाइट बंद हैं, इसका लेखा-जोखा तैयार किया जा रहा है। इस पर विपक्ष की ओर से संदेह जताया जा रहा है। विपक्ष का मानना है कि यदि चेकर्स ही नहीं है तो स्ट्रीट लाइट बंद होने की जानकारी कैसे मिल रही है।
सैकड़ों लाइट बंद, फिर भी करोड़ों का बिल
विभाग के आंकड़ों को ही देखा जाए तो सैकड़ों स्ट्रीट लाइट बंद होने की जानकारी उजागर हो रही है। इसके बावजूद विभाग 30 करोड़ से अधिक का बिजली बिल अदा कर रहा है। विभाग के ही आंकड़ों के अनुसार स्ट्रीट लाइटों के लिए विभाग की ओर से प्रति वर्ष 29.40 करोड़ का बिल दिया जा रहा है, जबकि ट्रैफिक सिग्नल के लिए 25.81 लाख और मनपा के अधिकार के कुओं पर लगे वाटर पंप के लिए 67.36 लाख रुपए का बिजली बिल चुकाया जा रहा है।
रखरखाव पर लाखों खर्च, बिजली बिल पर 30 करोड़ का खर्च
- 29.40 करोड़ स्ट्रीट लाइटों का बिल
- 25.81 लाख रुपये ट्रैफिक सिग्नल पर खर्च
- 67.36 लाख रुपये वाटर पंप का बिल
यह भी पढ़ें – राज्यसभा के लिए लॉबिंग तेज, शरद पवार के नाम पर सस्पेंस बरकरार, बीजेपी कोटे से चौंका सकते हैं ये नए चेहरे!
थर्ड पार्टी ऑडिट होना जरूरी
विपक्ष का मानना है कि मनपा के बिजली विभाग द्वारा किए जा रहे खर्च का थर्ड पार्टी ऑडिट किया जाना चाहिए। विभाग के आंकड़ों से ही कुछ धांधली होने का संदेह है। सिटी में महानगरपालिका के अधिकार में कितने कुएं हैं, इसका सटीक आंकड़ा उजागर नहीं हो रहा है, जबकि इन कुओं पर लगे वाटर पंप के लिए विभाग लाखों रुपए का बिजली बिल का भुगतान बदस्तूर कर रहा है।
सोलर सिटी के नाम पर केवल 3 जोन में पैनल
महानगरपालिका की ओर से सीमेंट रोड के अब तक हुए चरणों में 1,000 करोड़ से अधिक का खर्च किया गया है। डामर की सड़कों के रखरखाव पर हमेशा होने वाले खर्च से बचने के लिए सीमेंट रोड का विकल्प लाया गया किंतु उससे अधिक बिजली पर हो रहे खर्च पर कोई ध्यान नहीं दिया गया।
सोलर सिटी के नाम पर अब तक केवल 3 जोन में सोलर पैनल लगाए गए किंतु 7 मंजिला मुख्यालय पर सोलर एनर्जी तैयार करने की कोई योजना पर अमल नहीं किया गया जिससे हर वर्ष मनपा की तिजोरी केवल बिल अदा करने में खाली हो रही है।
Nagpur nmc electricity bill scam contractor maintenance audit
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