नागपुर मनपा (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Nagpur NMC Budget 2026-27: नागपुर मनपा आयुक्त के आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 के प्रस्तावित बजट को लेकर मनपा के गलियारों में हलचल तेज हो गई है। जहां इस बजट को लेकर आयुक्त की ओर से सिटी के लिए कई तरह की योजनाओं पर आशाएं जताई वहीं स्थायी समिति सभापति शिवानी दाणी ने बजट को सीमित बताते हुए इसमें आय बढ़ाने के कई विकल्प उपलब्ध होने की जानकारी पत्र-परिषद में दी।
उन्होंने कहा कि आयुक्त के इस बजट में स्थायी समिति की ओर से संशोधन कर आय के नए आयामों के साथ नया बजट पेश किया जाएगा जिसमें न केवल आय में वृद्धि के नए विकल्प होंगे बल्कि सिटी की जनता पर इसका बोझ भी नहीं बढ़ेगा।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रोफेशनल टैक्स वसूल करती है। नियमों के अनुसार सिटी से इस माध्यम से मिलने वाली आय का वैध हिस्सा महानगरपालिका को मिलना चाहिए। इसी तरह से मनपा की सम्पत्तियों का ऑडिट कर इससे भी आय बढ़ाने के स्रोत ढूंढे जा सकते है। पत्र-परिषद में सत्तापक्ष नेता बाल्या बोरकर उपस्थित थे।
उन्होंने कहा कि राजस्व प्राप्तियों को बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। चर्चा के दौरान उन्होंने कहा कि महानगरपालिका अब राज्य सरकार से ‘प्रोफेशनल टैक्स’ (व्यवसाय कर) में अपना हिस्सा मांगने की तैयारी में है।
विशेषत: साल 2017-19 के आंकड़ों के मुताबिक यह राशि लगभग 110 से 120 करोड़ रुपये के आसपास थी जो अब बढ़ चुकी होगी। हालांकि 2019 की एमनेस्टी स्कीम के कारण वास्तविक वसूली कम रही थी लेकिन वर्तमान प्रशासन राजस्व बढ़ाने को लेकर काफी सकारात्मक नजर आ रहा है और इस संबंध में मुख्यमंत्री से भी चर्चा की गई है।
नासिक और पुणे महानगरपालिकाओं की तर्ज पर इस बार 200 करोड़ रुपये का ‘ग्रीन बजट’ पेश करने का प्रस्ताव है जो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ी पहल मानी जा रही है। बजट में मुख्य रूप से 5 मूलभूत जरूरतों- सड़क, पानी, बिजली, कचरा प्रबंधन और ड्रेनेज पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। साथ ही, शिक्षा क्षेत्र को भी बजट में प्राथमिकता दी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक ‘कैपेक्स’ (केपिटल एक्सपेन्डीचर) पर खर्च नहीं किया जाएगा तब तक राजस्व में वृद्धि संभव नहीं है।
मनपा की कई संपत्तियां ऐसी हैं जिनका वर्तमान में कोई सटीक रिकॉर्ड नहीं है या वर्षों से उनका लीज रेंट बकाया है। इसे दुरुस्त करने के लिए प्रशासन अब सभी संपत्तियों की ‘जीआईएस मार्किंग’ करने जा रहा है। महापौर के साथ हुई चर्चा का हवाला देते हुए बताया कि एक विस्तृत ‘एसेट ऑडिट’ किया जाए, ताकि महानगरपालिका की संपत्तियों और उनसे होने वाली आय का कंक्रीट डेटा उपलब्ध हो सके।
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जहां एक तरफ राजस्व बढ़ाने की बात हो रही है वहीं दूसरी ओर अधिकारियों और पदाधिकारियों के लिए नई गाड़ियों की खरीदी ने विवाद खड़ा कर दिया है। प्रशासन ने 30 लाख रुपये (जीएसटी अलग से) की सीमा तक वाहन खरीदने का प्रस्ताव मंजूर किया है। इस पर विपक्ष ने सवाल उठाया है कि जब पिछले 15 सालों से मनपा की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है तो इतनी महंगी गाड़ियों की क्या आवश्यकता है? इस संदर्भ में स्थायी समिति सभापति ने कहा कि मामले पर चर्चा करने के बाद ही निर्णय लिया जाएगा