Nagpur: नए संशोधन से बदला नागपुर मनपा का समीकरण, नामनिर्देशित सदस्यों से बढ़ेगी ताकत
Maharashtra: महाराष्ट्र महानगरपालिका अधिनियम में संशोधन के बाद नागपुर महानगरपालिका सदन की सदस्य संख्या 161 हो गई है।BJP पहले से बहुमत में है और अब नामनिर्देशित सदस्यों से उसका प्रभाव और बढ़ने वाला है।
Nagpur News In Hindi: महाराष्ट्र महानगरपालिका अधिनियम में हुए नए संशोधन के बाद अब नागपुर महानगरपालिका के सदन की कुल सदस्य संख्या 161 हो जाएगी। पहले यह संख्या 156 थी जिसमें 151 निर्वाचित और 5 नामनिर्देशित सदस्य शामिल थे।
राज्य सरकार द्वारा अधिनियम में किए गए बदलावों के कारण अब निर्वाचित सदस्यों के 10 प्रतिशत या न्यूनतम 10 सदस्यों को नामनिर्देशित किया जा सकेगा जिससे सदन की क्षमता में वृद्धि हुई है।
बीजेपी ने पार किया बहुमत का आंकड़ा
भाजपा और कांग्रेस की स्थिति हाल ही में हुए चुनावों में भाजपा ने 102 सीटों पर जीत हासिल कर बहुमत का आंकड़ा आसानी से पार कर लिया है और सबसे बड़े दल के रूप में उभरी है।
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वहीं कांग्रेस 34 सीटों के साथ मुख्य विपक्षी दल के रूप में सामने आई है। अन्य दलों में एआईएमआईएम ने 6, इंडियन मुस्लिम लीग ने 4, शिवसेना ठाकरे ने 2, शिवसेना ने 1 और बसपा ने 1 सीट पर जीत दर्ज की है।
किसे मिलेगा मौका और क्या होंगे अधिकार?
अधिनियम के अनुसार, नामनिर्देशित सदस्यों के रूप में उन विशेषज्ञों को नियुक्त किया जाता है जिन्हें नागरी प्रशासन का अनुभव या विशेष ज्ञान हो। हालांकि व्यावहारिक रूप से इन पदों पर अक्सर चुनाव हार चुके उम्मीदवारों या पार्टी के निष्ठावान कार्यकर्ताओं को जगह दी जाती है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि ये नामनिर्देशित सदस्य सदन की चर्चाओं में तो हिस्सा ले सकेंगे लेकिन उन्हें किसी भी प्रस्ताव पर मतदान करने का अधिकार नहीं होगा। इन सदस्यों के नामों का चयन महापौर और उपमहापौर की नियुक्ति के बाद किया जाएगा।
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समितियों और जोन में सत्ता का समीकरण सदन के साथ साथ भाजपा का वर्चस्व स्थायी समिति और जोन स्तर पर भी दिखाई दे रहा है। स्थायी समिति की 16 में से 10 सीटें भाजपा को मिलने की संभावना है, जबकि कांग्रेस को 4 सीटें मिल सकती हैं। शहर के कुल 10 जोन में से 8 पर भाजपा का कब्जा है जिस कारण अधिकांश जोन सभापति भाजपा के ही होंगे। कांग्रेस मंगलवारी जोन 16 में से 11 पार्षद और आसीनगर जोन में मजबूत है लेकिन आशीनगर में अन्य छोटे दलों एआईएमआईएम, मुस्लिम लीग और बसपा का गठबंधन कांग्रेस के लिए चुनौती पैदा कर सकता है।
