436 लोगों की जान लेने वाली चंपावत बाघिन की खौफनाक कहानी, विश्व बाघ दिवस पर जानिए पुरा सच
World Tiger Day: विश्व बाघ दिवस पर जानिए चंपावत की उस आदमखोर बाघिन की कहानी, जिसने नेपाल और भारत में 436 लोगों की जान लेकर इतिहास में दुनिया की सबसे खतरनाक आदमखोर बाघिन के रूप में जगह बनाई।
- Written By: अंकिता पटेल
आदमखोर बाघिन, विश्व बाघ दिवस (प्रतीकात्मक तस्वीर, सोर्स: AI)
Champawat Man Eater Tigress: एक सदी से भी अधिक पहले हिमालय की तराई में एक ऐसी बाधिन का आतंक था जिसने नेपाल और भारत के सैकड़ों गांवों में दहशत फैला दी थी। ‘चंपावत’ नामक आदमखोर बाघिन को दुनिया का सबसे खतरनाक आदमखोर माना जाता है। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार उसने 436 लोगों की जान ली जिसके बाद उसका नाम इतिहास में दर्ज हो गया।
बुधवार 29 जुलाई को विश्व बाघ दिवस मनाया जाएगा। बताया जाता है कि 1890 के दशक के अंत में नेपाल के जंगलों में रहने वाली इस बंगाल टाइग्रेस के शिकार की क्षमता एक शिकारी की गोली लगने से खत्म हो गई थी।
जबड़े की चोट ने चंपावत बाघिन को बनाया आदमखोर
गोली से उसका जबड़ा और दांत बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए जिससे वह जंगली शिकार नहीं कर पाती थी। भूख से मजबूर होकर उसने इंसानों को अपना शिकार बनाना शुरू कर दिया। शुरुआत में उसके हमलों को गंभीरता से नहीं लिया गया लेकिन धीरे-धीरे मौतों का आंकड़ा बढ़ता गया। नेपाल में करीब 200 लोगों को मारने के बाद वह शारदा नदी पारकर भारत के कुमाऊं क्षेत्र में पहुंच गई।
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उसकी मौजूदगी से गांव खाली होने लगे, खेतों में काम बंद हो गया और लोगों ने जंगलों की ओर जाना छोड़ दिया। वह दिनदहाड़े हमला करती थी और अक्सर महिलाओं व बच्चों को निशाना बनाती थी। बाघिन को मारने के लिए इनाम घोषित किए गए और कई शिकारी उसके पीछे लगाए गए।
नेपाल की सेना ने भी उसे घेरने की कोशिश की लेकिन वह हर बार बच निकलती थी। वह कई-कई मील तक इलाका बदलकर हमला करती थी जिससे उसके अगले शिकार का अनुमान लगाना लगभग असंभव हो गया था।
जिम कॉर्बेट ने दिलाई मुक्ति
वर्ष 1907 में ब्रिटिश प्रशासन ने प्रसिद्ध शिकारी जिम कॉर्बेट को यह जिम्मेदारी सौंपी। चंपावत के 16 वर्षीय एक लड़की की हत्या के बाद कॉर्बेट ने उसके पैरों के निशान और खून के धब्बों का पीछा किया। करीब 300 ग्रामीणों की मदद से घेराबंदी की गई।
आमने-सामने की मुठभेड़ में बाधिन ने कॉर्बेट पर भी हमला किया लेकिन उन्होंने पहले अपनी राइफल और फिर एक ग्रामीण की बंदूक से बेहद नजदीक से अंतिम गोली चलाकर उसका अंत कर दिया।
गलती ने लाई आफत
बाधिन के शव की जांच में उसके टूटे हुए दांत और क्षतिग्रस्त जबड़े मिले। इससे यह स्पष्ट हुआ कि गंभीर चोट के कारण वह जंगली शिकार करने में असमर्थ हो गई थी और मजबूरी में इंसानों पर हमला करने लगी।
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शिकारियों की गलती के कारण यह आफत 400 से अधिक लोगों पर आई। इस घटना ने जिम कॉर्बेट की सोच भी बदल दी। बाद के वर्षों में उन्होंने वन्यजीव संरक्षण का समर्थन किया और माना कि जंगलों का विनाश तथा मानव अतिक्रमण ही ऐसे संघर्षों की बड़ी वजह है।
-नवभारत लाइव के लिए नागपुर से अभिषेक सिंह की रिपोर्ट
