लोक अदालत में रिकॉर्ड निपटारा: 77 हजार से ज्यादा मामलों का समाधान, 1.28 अरब रुपये के समझौते
National Lok Adalat Nagpur: नागपुर में राष्ट्रीय लोक अदालत ने 77,449 मामलों का निपटारा किया। मोटर दुर्घटना में ₹19 करोड़ से अधिक मुआवजा, कुल समझौता राशि ₹128 करोड़ पार।
- Written By: प्रिया जैस
लोक अदालत (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Legal Services Authority Maharashtra: नागपुर जिले में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत को नागरिकों से अभूतपूर्व प्रतिसाद मिला। यह एक बार फिर साबित हो गया कि राष्ट्रीय लोक अदालत लोगों की समस्याओं का त्वरित समाधान करने का सर्वोत्तम मार्ग है।
महाराष्ट्र राज्य विधि सेवा प्राधिकरण, मुंबई के निर्देशानुसार और नागपुर जिला न्यायालय के पालक न्यायमूर्तियों (न्यायमूर्ति अनिल किल्लोर और न्यायमूर्ति प्रफुल्ल खुबालकर) के मार्गदर्शन तथा प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश डी.पी. सुराणा की देखरेख में जिला न्यायालय, पारिवारिक न्यायालय, ऋण वसूली न्यायाधिकरण, सहकारिता न्यायालय, औद्योगिक एवं श्रम न्यायालय और नागपुर जिले के सभी तालुका न्यायालयों में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया था।
आंकड़ों पर एक नज़र
| विवरण | संख्या | राशि (₹) |
|---|---|---|
| कुल निपटाए गए मामले | 77,449 | उपलब्ध नहीं |
| कुल समझौता राशि | उपलब्ध नहीं | 1 अरब 28 करोड़ 26 लाख 36 हजार |
| ऋण वसूली राशि | उपलब्ध नहीं | 38 करोड़ 73 लाख 64 हजार |
| मोटर दुर्घटना दावों की संख्या | 260 | उपलब्ध नहीं |
| मोटर दुर्घटना मुआवजा राशि | उपलब्ध नहीं | 19 करोड़ 36 लाख 83 हजार |
| ट्रैफिक ई-चालान मामले | 471 | उपलब्ध नहीं |
| लोक अदालत में लंबित मामलों से निपटाए गए | 4,886 | — |
| दाखिल-पूर्व मामलों से निपटाए गए | 72,563 | — |
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लंबित मामले: लोक अदालत में लंबित मामलों में से 4,886 मामले समझौते से निपटाए गए।
दाखिल-पूर्व मामलों में से 72,563 मामले आपसी समझौते से निपटाए गए।
महत्वपूर्ण समझौते
मोटर दुर्घटना दावा: लोक अदालत में मोटर दुर्घटना दावा प्राधिकरण के तहत नियमित दरखास्त क्रमांक 234/2025 के एक मामले में समझौते के दौरान मृतक के वारिसों को 1,60,00,000 का चेक दिया गया।
अन्य मोटर दुर्घटना दावा: मोटर दुर्घटना दावा क्रमांक 643/2022 के एक अन्य मामले में मृतक के वारिसों को समझौते के दौरान 1,10,00,000 मंजूर किए गए और इसका चेक दिया गया।
वृद्ध व्यक्ति का मामला: विशेष एमआरवीएम क्रमांक 191/2024 (धारा 135 एमआरवीएम अधिनियम) के एक मामले में 80 वर्षीय वृद्ध व्यक्ति ने चर्चा के बाद समझौता करके मामला निपटाया।
पारिवारिक मामले: तलाक की कगार पर पहुंच चुके कुछ वैवाहिक मामलों में पति-पत्नी के बीच समझौता हुआ और उन्होंने फिर से अपना वैवाहिक जीवन शुरू किया।
