मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (सोर्स: सोशल मीडिया)
Nagpur Election Political Rally: नागपुर महानगरपालिका चुनाव के लिए कुछ दिनों से चल रहा प्रचार अभियान मंगलवार को अपने आखिरी मुकाम पर पहुंच जाएगा। प्रचार के इस आखिरी पड़ाव पर सभी दलों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। चुनाव आयोग के नियमानुसार शाम 5 बजे के बाद लाउडस्पीकर खामोश हो जाएंगे और रैलियों का शोर थम जाएगा। इसके बाद शुरू होगा ‘साइलेंट पीरियड’, जिसमें उम्मीदवार केवल व्यक्तिगत रूप से मतदाताओं से मिल सकेंगे।
प्रचार के आखिरी 24 घंटों को भुनाने के लिए राजनीतिक दलों ने अपनी रणनीति बदल दी है। मंगलवार का दिन ‘अंतिम प्रहार’ के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें राजनीतिक दलों की तूफानी रैलियां और प्रचार सभाएं भी होंगी। दिग्गज नेता और उम्मीदवार सुबह से ही एक वार्ड से दूसरे वार्ड में भागते नजर आएंगे ताकि कोई भी कोना अछूता न रहे। अंतिम शक्ति प्रदर्शन के रूप में शहर के विभिन्न हिस्सों में विशाल समापन रैलियों और पदयात्राओं का आयोजन होगा। हर दल की कोशिश है कि वह अपनी भीड़ से प्रतिद्वंद्वी को मनोवैज्ञानिक रूप से पीछे छोड़ दे। अंतिम दिन के विज्ञापनों और भाषणों में उम्मीदवार जनता से भावुक अपील और क्षेत्र के विकास के अंतिम वादे करते दिखेंगे।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस अपने होम टाउन नागपुर में एक विशाल रोड शो के जरिए जनता से सीधा संवाद करेंगे। भाजपा ने शहर में धुआंधार प्रचार शुरू कर दिया है। नागपुर भाजपा का अभेद्य किला रहा है, जिसे बरकरार रखना फडणवीस के लिए प्रतिष्ठा का सवाल है।
जैसे ही मंगलवार शाम को सामूहिक प्रचार बंद होगा, उम्मीदवारों का ध्यान माइक्रो-मैनेजमेंट पर शिफ्ट हो जाएगा। घर-घर जाकर वोटर लिस्ट की पर्चियां बांटने का काम तेज कर दिया गया है। बिना किसी बैनर और झंडे के गुप्त रूप से नुक्कड़ सभाएं भी हो सकती हैं। शाम ढलने से पहले छोटी-छोटी नुक्कड़ सभाओं के जरिए अंतिम संदेश पहुंचाने की तैयारी है। जमीनी शोर थमने के बाद सोशल मीडिया (वाट्सएप, फेसबुक) पर प्रचार की जंग और तेज होने की उम्मीद है।
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चुनाव प्रचार खत्म होने के साथ ही प्रशासन की जिम्मेदारी बढ़ जाएगी। प्रशासन की ओर से पहले ही आचार संहिता का हवाला देते हुए चुनाव आयोग के दिशानिर्देशों का पालन करने का सुझाव सभी राजनीतिक दलों और निर्दलीय प्रत्याशियों को दिए गए हैं। शराब की दुकानें बंद रहेंगी और आचार संहिता का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। बाजारों और चौराहों पर चर्चा का बाजार गर्म है। जहां राजनीतिक दल अपनी जीत के दावे कर रहे हैं वहीं आम जनता चुपचाप उम्मीदवारों के दावों को तौल रही है। प्रचार का अंतिम दिन तय करेगा कि प्रचार की यह गूंज मतदाताओं के ईवीएम (EVM) बटन तक कितनी प्रभावी ढंग से पहुंच पाती है।