स्वच्छ सर्वेक्षण में पिछड़ने के बाद जागा नागपुर प्रशासन, अब कचरा संकलन वाहनों...

Nagpur in Swachh Sarvekshan: स्वच्छ भारत सर्वेक्षण 2024-25 में नागपुर शहर राष्ट्रीय स्तर पर 27वें स्थान पर रहा। इसके बाद नागपुर प्रशासन जागा है। अब कचरा संकलन की जांच की जा रही है।
Nagpur Municipal Corporation is checking garbage collection vehicles
कचरा संकलन वाहनों की जांच करते नागपुर महानगर पालिका के अधिकारी (फोटो नवभारत)
Updated on

Nagpur News: महाराष्ट्र के नागपुर शहर को स्वच्छ और सुंदर बनाए रखने के लिए मनपा की ओर से भले ही करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हों लेकिन जमीनी स्तर पर इसका असर दिखाई नहीं दे रहा है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हाल ही में केंद्र सरकार की ओर से उजागर स्वच्छता सर्वेक्षण में महानगर पालिकाओं की रैंकिंग में नागपुर महानगर पालिका को कचरा संकलन में केवल 30 प्रतिशत अंक मिले हैं। स्वच्छता अभियान के तहत आयोजित स्वच्छ भारत सर्वेक्षण 2024-25 में नागपुर शहर राष्ट्रीय स्तर पर 27वें स्थान पर रहा।

कचरा संकलन के लिए महानगर पालिका की ओर से एजी इन्फ्रा प्रा. लि. और बीवीजी इंडिया लि. कंपनी को करोड़ों रुपए का भुगतान किया जा रहा है। आलम यह है कि रैंकिंग में सिटी भले ही कोई सफलता हासिल नहीं कर पाई हो किंतु अंक कम मिलने के बाद हरकत में आई मनपा की ओर से अब कचरा संकलन करने वाले वाहनों की जांच की जा रही है। यह एक तरह से सांप निकल जाने के बाद लाठी पीटने की कहावत को चरितार्थ करने जैसा है।

कई बार उजागर हुई लापरवाह कार्यप्रणाली

सूत्रों के अनुसार शहर में घर-घर से कचरा संकलन सुनिश्चित करने के लिए ही महानगर पालिका ने इसके पूर्व की एक कम्पनी को बदलकर 2 कंपनियों की नियुक्ति की थी किंतु आलम यह रहा कि शुरू से ही एजी एन्वायरों और बीवीजी इंडिया प्रा.लि. कंपनी की कार्यप्रणाली संदेह के घेरे में रही है।

पश्चिम नागपुर के विधायक विकास ठाकरे ने कम्पनी की भ्रष्ट कार्यप्रणाली भी उजागर की थी। इसके अलावा तत्कालीन पार्षदों और स्थानीय कार्यकर्ताओं की ओर से कंपनियों की कार्यप्रणाली पर नाराजगी व्यक्त की गई थी।

इसके बावजूद आश्चर्यजनक यह कि इन दोनों कंपनियों के खिलाफ किसी तरह की कड़ी कार्रवाई नहीं की गई। अलबत्ता अब इन कंपनियों की लापरवाह कार्यप्रणाली के चलते कचरा संकलन में महानगर पालिका फिसड्डी साबित हो गई। लगातार कंपनियों की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगने के बाद भी कंपनियों पर कार्रवाई नहीं होने से अब तरह-तरह के संदेह जताए जा रहे हैं। कुछ स्थानिय नेता खुले तौर पर साठगांठ के आरोप तक लगा रहे हैं।

536 वाहनों की हुई जांच

  • देर से ही सही किंतु अब महानगर पालिका की ओर से कचरा संकलन को लेकर गंभीरता जताई गई है। यही कारण है कि सोमवार को अचानक विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहीं अतिरिक्त आयुक्त वसुमना पंत की ओर से कचरा संकलन वाहनों की जांच की गई।
  • कचरा संकलन और परिवहन व्यवस्था में पारदर्शिता लाने तथा नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए मनपा के सभी 10 जोन में कचरा संकलन वाहनों के पार्किंग स्थल पर जाकर निरीक्षण किया गया।
  • घनकचरा व्यवस्थापन विभाग के उपायुक्त राजेश भगत, मुख्य स्वच्छता अधिकारी डॉ. गजेन्द्र महल्ले तथा दोनों कंपनियों के प्रतिनिधि उपस्थित थे। दोनों कंपनियों की ओर से कचरा संकलन के लिए कुल 536 वाहनों को तैनात किया गया है।

इस तरह हुई जांच

सेंटर का नाम वाहनों की संख्या
सीतानगर सेंटर 64
जयताला सेंटर 69
बुधवार बाजार सेंटर 13
भांडेवाड़ी (एजी) 150
भांडेवाड़ी (बीवीजी) 87
दहीबाजार सेंटर 35
कामगार नगर सेंटर 56
आहूजानगर सेंटर 57
मानकापुर घाट सेंटर 5
Navbharat Live
navbharatlive.com