10 महीने बाद भी खाली हाथ, पहलगाम के शहीद हुए संतोष जगदाले की बेटी को अब तक नहीं मिली है सरकारी नौकरी

Asawari Jagdale: पहलगाम आतंकी हमले में शहीद संतोष जगदाले की बेटी असावरी को 10 महीने बाद भी सरकारी नौकरी नहीं मिली है। उन्होंने अब अमित शाह से न्याय की गुहार लगाई है।
Asawari Jagdale On Government Job
Asawari Jagdale On Government Job (फोटो क्रेडिट-इंस्टाग्राम)
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Asawari Jagdale On Government Job: पुणे के संतोष जगदाले ने 10 महीने पहले कश्मीर के पहलगाम हमले में अपनी जान गंवा दी थी। उस समय पूरा देश इस शोक में डूबा था और सरकार ने शहीद के परिवार को सहारा देने के बड़े-बड़े वादे किए थे। लेकिन आज हकीकत यह है कि जगदाले परिवार न केवल अपने मुखिया को खोने के गम में है, बल्कि सरकारी तंत्र की बेरुखी और लालफीताशाही (Red-tapism) से भी लड़ रहा है।

शहीद की उच्च शिक्षित बेटी असावरी जगदाले पिछले 10 महीनों से मंत्रालय के चक्कर काट रही हैं, लेकिन सरकार द्वारा सार्वजनिक रूप से किया गया 'सरकारी नौकरी' का वादा अभी तक फाइलों में ही दफन है।

फाइलों के खेल में उलझा 'शहीद' का सम्मान

जय महाराष्ट्र को असावरी जगदाले ने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि वह पिछले 9 महीनों से लगातार सरकारी दफ्तरों के दरवाजे खटखटा रही हैं। जब भी वे किसी अधिकारी से मिलती हैं, उन्हें केवल आश्वासन मिलता है कि उनकी फाइल प्रक्रिया में है। असावरी ने दुख जताते हुए कहा, "अधिकारी कहते हैं कि फाइलें 'अनापत्ति' (NOC) के दायरे में अटकी हैं। समझ नहीं आता कि पिता को खोने के बाद हमें अपने हक के लिए इतना संघर्ष क्यों करना पड़ रहा है।" परिवार इस समय गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है, लेकिन मंत्रालय की फाइलों में संवेदनाएं कहीं खो गई हैं।

मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री से मिलने की नाकाम कोशिश

असावरी और उनकी मां प्रगति जगदाले ने मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री से मिलने की कई कोशिशें कीं, लेकिन उन्हें हर बार निराशा ही हाथ लगी। मुख्यमंत्री के निजी सचिवों से बार-बार संपर्क करने के बावजूद मुलाकात का समय नहीं दिया गया। असावरी का कहना है कि उन्हें उम्मीद थी कि मुख्यमंत्री कम से कम फोन पर उनसे बात करेंगे, लेकिन सरकार की ओर से कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली। शहीद की बेटी ने गुस्से और दुख के साथ पूछा है, "क्या हमें न्याय पाने के लिए भी भीख मांगनी पड़ेगी? मेरी सरकारी नौकरी का क्या हुआ?"

अमित शाह से न्याय की गुहार

राज्य सरकार की उदासीनता से तंग आकर असावरी जगदाले ने अब दिल्ली का रुख किया है। राज्यसभा सांसद मेधा कुलकर्णी के माध्यम से उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है। इस पत्र में उन्होंने कश्मीर हमले की भयावहता और उसके बाद राज्य सरकार द्वारा किए गए उन वादों का विवरण दिया है जिन्हें अब भुला दिया गया है। असावरी ने गृह मंत्री से आग्रह किया है कि एक विभाग द्वारा दूसरे पर जिम्मेदारी डालने के इस खेल को बंद करवाया जाए और उन्हें जल्द से जल्द नौकरी दी जाए। अब देखना यह है कि क्या केंद्र सरकार के निर्देश के बाद महाराष्ट्र का सोया हुआ प्रशासन जागता है और शहीद संतोष जगदाले के परिवार को उनका उचित सम्मान और सहारा मिलता है।

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