मनपा चुनाव: फडणवीस के गढ़ में ‘अपनों’ की बगावत, भाजपा का टेंशन बढ़ा, कांग्रेस भी ‘पवार पावर’ से परेशान
Nagpur Municipal Corporation election 2026: नागपुर मनपा चुनाव में भाजपा-शिंदे गठबंधन बनाम कांग्रेस-NCP की सीधी भिड़ंत। 151 सीटों पर साख की लड़ाई और बागियों का सिरदर्द।
- Written By: प्रिया जैस
एकनाथ शिंदे-हर्षवर्धन सपकाल-देवेंद्र फडणवीस-शरद पवार (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Maharashtra Politics: महाराष्ट्र की उपराजधानी और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ-साथ केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का होम ग्राउंड इस समय एक बड़ी सियासी अग्निपरीक्षा का केंद्र बना हुआ है। महानगरपालिका के लिए 15 जनवरी को मतदान होना है और यहां की सत्ता पर पिछले 15 वर्षों से काबिज भारतीय जनता पार्टी के सामने इस बार ‘जीत का चौका’ लगाने की कड़ी चुनौती है।
शिंदे के ‘सिपाही’ और अपनों की बगावत
भाजपा के लिए सबसे बड़ी मुश्किल महायुति के सहयोगी एकनाथ शिंदे की शिवसेना और खुद पार्टी के भीतर से आ रही है। सूत्रों के अनुसार, शिंदे की शिवसेना को गठबंधन में मात्र 8 सीटें मिली हैं जिससे नाराज होकर 30 से अधिक नेताओं ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर नामांकन दाखिल कर दिया है।
इसके अलावा भाजपा ने सत्ता विरोधी लहर को रोकने के लिए अपने 108 मौजूदा पार्षदों में से 63 के टिकट काट दिए हैं जिससे पार्टी के भीतर भी असंतोष की लहर है। भाजपा के चुनाव प्रभारी इन नाराज नेताओं को मनाने की कोशिशों में जुटे हैं क्योंकि यह बगावत सीधे तौर पर हिंदुत्व वोट बैंक को प्रभावित कर सकती है।
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कांग्रेस और विपक्ष का समीकरण
विपक्ष में कांग्रेस ने सभी 151 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया है लेकिन उसकी राह में शरद पवार और अजीत पवार की एनसीपी बाधा बन रही है। शरद पवार की पार्टी ने 76 और अजीत पवार की पार्टी ने 96 उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं जो कांग्रेस के पारंपरिक दलित और मुस्लिम वोट बैंक में सेंध लगा सकते हैं।
विशेष रूप से प्रभाग 21-डी और वार्ड 13 जैसे क्षेत्रों में मजबूत उम्मीदवारों के उतरने से मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है। कुछ राजनीतिकों का मानना है कि अब पहले जैसी स्थिति नहीं रही है। भले ही कुछ सीटों पर बागी प्रत्याशी हो किंतु मतदाता निश्चित ही समझदार हो गया है। ऐसे में चौरंगी लडाई में कौनसा प्रत्याशी, किसे नुकसान पहुंचाता है। यह चुनाव के बाद ही उजागर हो सकेगा।
चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार विभिन्न प्रभागों में उम्मीदवारों की स्थिति इस प्रकार है:
वार्ड 29 : कुल 27 वैध नामांकित उम्मीदवार
वार्ड 31 : यहां सबसे अधिक गहमागहमी है जहां 35 वैध उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं
वार्ड 32 : कुल 26 वैध उम्मीदवार
वार्ड 34 : यहां 25 उम्मीदवारों के नामांकन वैध पाए गए हैं
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साख की लड़ाई
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस जो 1997 में मात्र 27 साल की उम्र में नागपुर के मेयर बने थे, उनके लिए यह चुनाव अपनी राजनीतिक विरासत और गढ़ को बचाने की बड़ी चुनौती है। 151 सीटों वाले इस सदन में भाजपा ने 143 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे हैं, जबकि राज ठाकरे की मनसे ने भी 22 सीटों पर उम्मीदवार खड़े कर मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है।
यह चुनाव केवल स्थानीय मुद्दों का नहीं बल्कि आने वाले बड़े चुनावों के लिए एक लिटमस टेस्ट भी माना जा रहा है। भारी संख्या में बागी प्रत्याशियों के उतरने की भनक लगते ही अब स्वयं फडणवीस ने कुछ हद तक बागडोर अपने हाथों में ले ली है जिससे नामांकन वापसी तक कुछ प्रत्याशियों द्वारा नाम वापस लेने की भी अटकलें लगाई जा रही हैं।
