नागपुर मनपा घोटाला,(प्रतीकात्मक तस्वीर सोर्स: सोशल मीडिया) 
नागपुर

नागपुर मनपा में हंगामा,नाला सफाई में करोड़ों की गड़बड़ी? फर्जी बिलों का आरोप; जांच समिति की मांग तेज

Nagpur Drain Cleaning Scam: नागपुर मनपा में नाला सफाई पर करोड़ों की अनियमितता का आरोप। फर्जी बिल पास करने का मुद्दा गरमाया, जांच के लिए समिति गठन की मांग।

अंकिता पटेल

Nagpur Municipal Scam: नागपुर महानगर पालिका की आम सभा में नदी और नालों की सफाई के नाम पर करोड़ों रुपये की भारी वित्तीय अनियमितता का मामला गूंजा। नगरसेविका आभा पांडे और अन्य सदस्यों ने आरोप लगाया कि निजी ठेकेदारों की जेब भरने के लिए प्रशासन द्वारा फर्जी बिल पास किए जा रहे हैं। इस 'बंदरबांट' की जांच के लिए सदन में एक त्रि-सदस्यीय समिति के गठन की जोरदार मांग उठाई गई।

लोक सहभागिता से शुरू हुआ था अभियान, अब हुआ निजीकरण

सदन का ध्यान आकर्षित करते हुए आभा पांडे ने बताया कि वर्ष 2012-13 में तत्कालीन महापौर अनिल सोले ने बिना मनपा का पैसा लगाए, जनभागीदारी से नदी-नाले साफ करने का बेहतरीन उपक्रम शुरू किया था लेकिन इसके बाद महानगर पालिका ने इस काम का निजीकरण कर दिया, सफाई के आंकड़ों में भारी झोल सामने आया है।

मनपा के अनुसार 2021 में 10,175 मीट्रिक टन, 2022 में 9,130 मीट्रिक टन और 2023 में 7,160 मीट्रिक टन कचरा निकाला गया। यह ग्राफ वैज्ञानिक तरीके से नीचे जा रहा था, लेकिन अचानक अगले वर्ष यह आंकड़ा बढ़कर दोगुने से अधिक हो गया, जो कि संदेहास्पद है।

विभागीय आंकड़ों के अनुसार किराये के वाहनों और मशीनों पर मनपा ने 5.72 करोड़ रुपये से अधिक का खर्च किया है। पहले यही काम सीएसआर फंड के तहत लाखों रुपयों में हो जाता था। आरोप है कि मनपा के पास पर्याप्त बजट होने के बावजूद भाड़े पर मशीनें लेकर ठेकेदारों को फायदा पहुंचाया जा रहा है।

सरकारी मशीनों से काम बिल ठेकेदारों के नाम

सदन में एक अन्य नगरसेवक ने भी इस आरोप का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि नाले और नदी की सफाई महानगर पालिका के अपने टिप्पर और जेसीबी से होती है, लेकिन उसका बिल निजी फर्म और ठेकेदारों के नाम पर निकाला जाता है।

भांडेवाड़ी डंपिंग यार्ड में वजन कांटे का खेल

एजी और बीवीजी जैसी कंपनियों पर आरोप लगाए गए कि वे छोटे नालों का कचरा वजन काटे पर ले जाकर करोड़ों रुपये का अर्थार्जन कर रही है। पार्षद अभिजीत झा ने कहा कि ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने के लिए भाडेवाडी डंपिंग यार्ड में संवानिवृत अधिकारी रोहिदास राठौड़ की सलाहकार के रूप में नियुक्त किया गया है, जो 'वसूली एजेंट' के रूप में काम कर रहे हैं। पार्षद झा ने उन्हें तत्काल प्रभाव से हटाने और डंपिंग यार्ड व कजन काटे पर लगे सीसीटीवी कैमरों का लाइव कोड सीधे निगमायुक्त के डैशबोर्ड पर देने की मांग की।

हर 1-2 घंटे में मशीन बंद करनी पड़ती थी

सबसे चौकाने वाला खुलासा मशीनों के काम के घंटों को लेकर हुआ। प्रशासन ने ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने के लिए पोकलेन मशीनों के दिन में 20-20 घंटे लगातार चलने के बिल पास कर दिए, नगरसेविका ने तुलसीनगर-शांतिनगर नाले पर स्वयं जाकर निरीक्षण किया, जहां उन्होंने पाया कि इंजन गर्म होने के कारण पोकलेन चालक को हर 1-2 घंटे में मशीन बंद करनी पड़ती थी। उन्होंने कड़े शब्दों में मांग की कि जिन कार्यकारी अभियंताओं ने इन फर्जी बिली को प्रमाणित किया है, उनके वेतन से इस अतिरिक्त खर्च की वसूली की जाए।

उपजाऊ माटी से राजस्व का कोई मॉडल नहीं

पोहरा नदी से निकलने वाली शुद्ध माटी का कोई हिसाब नहीं है। मुंबई मनपा (BMC) जहां इस माटी का उपयोग सौंदयीकरण और मैदानों के रखरखाव के लिए करके राजन्य उत्पन्न करती है, वहीं नागपुर मनपा की माटी मुफ्त में निजी खेतों और अन्य जगहों पर डंप की जा रही है।

महापौर का सख्त रुख ऑडिट के दिए निर्देश

मामले की गंभीरता और भारी अनियमितताओं को देखते हुए महापौर ने प्रशासन को सख्त निर्देश दिए, महापौर ने कहा कि इस पूरे मामले का ऑडिट कराया जाएगा। इसके साथ ही यह भी निर्देश दिए गए कि नीरी द्वारा दिए गए पर्यावरण और नदी नाली से संबंधित 25 लाख रुपये की रिपोर्ट की सिफारिशों का सख्ती से पालन किया जाए और मनपा के लिए राजस्व उत्पन्न करने की उचित नीति बनाई जाए।

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