जनता बेहाल पर नेताओं को चाहिए लग्जरी कार! प्रशासन की लापरवाही से खाली हुआ NMC का बेड़ा, अब नई खरीद की तैयारी
Nagpur News: नागपुर महानगरपालिका में चार साल बाद निर्वाचित प्रतिनिधियों की वापसी हो रही है, लेकिन प्रशासक राज में गाड़ियां बांट दिए जाने से अब मेयर व पदाधिकारियों के पास सरकारी वाहन ही नहीं बचे हैं।
- Written By: आकाश मसने
कार (AI Generated Image)
Nagpur Mayor Vehicle Issue: नागपुर महानगरपालिका में चार साल के ‘प्रशासक राज’ के बाद अब निर्वाचित प्रतिनिधियों की वापसी तो हो रही है, लेकिन उनके स्वागत के लिए निगम के पास गाड़ियां ही नहीं बची हैं। जहां एक ओर पूरा शहर दूषित पानी सहित अनेक समस्याओं से जूझ रहा है वहीं दूसरी ओर प्रशासन अब नए निर्वाचित पदाधिकारियों के लिए वाहनों का जुगाड़ करने में अपनी पूरी ऊर्जा लगा रहा है।
बांट दी गईं गाड़ियां
मार्च 2022 में आम सभा भंग होने के बाद मेयर, डिप्टी मेयर और स्थायी समिति अध्यक्ष जैसे पदों के लिए आरक्षित वाहनों का बेड़ा खाली पड़ा था। प्रशासन ने इन गाड़ियों को धूल खाने से बचाने के लिए विभिन्न विभागों के अधिकारियों (स्मार्ट सिटी सीईओ, अतिरिक्त आयुक्त और स्वास्थ्य अधिकारियों) को सौंप दिया। पदाधिकारियों के लिए आरक्षित 7 वाहनों में से एक को ‘कबाड़’ घोषित कर दिया गया है, जबकि शेष 6 वाहन अभी भी आला अधिकारियों के कब्जे में हैं। अब जब नए नेता चुनकर आ गए हैं, तो उनके पास शहर का दौरा करने और जनसमस्याएं सुनने के लिए ‘सरकारी सवारी’ उपलब्ध नहीं है।
खजाने पर पड़ेगा बोझ
21 जनवरी को प्रशासन ने यांत्रिक विभाग से वाहनों की व्यवस्था पर प्रस्ताव मांगा है। नियमों के मुताबिक कि मेयर के लिए 30 लाख रुपये तक की कार खरीदी जा सकती है। डिप्टी मेयर, सत्तारूढ़ दल के नेता और विपक्ष के नेता जैसे अन्य पदों के लिए भी इसी तरह के प्रावधान हैं। जोनल चेयरमैन और विभिन्न समितियों के अध्यक्षों को मिलाकर यह सूची काफी लंबी हो जाती है। नागपुर मनपा प्रशासन अब पुरानी गाड़ियां वापस बुलाने, नई गाड़ियां खरीदने या उन्हें मासिक किराये पर लेने के विकल्पों पर विचार कर रहा है।
सम्बंधित ख़बरें
रिटायरमेंट इंक्रीमेंट पर हाई कोर्ट का फैसला: मनपा अधिकारियों की लापरवाही पर जताई नाराजगी, जांच के निर्देश
Akola News: अकोला में GIS सर्वे से 12,958 नई संपत्तियां मिलीं, बढ़ेगा मनपा का राजस्व
नागपुर मनपा आयुक्त को हाई कोर्ट से बड़ी राहत: आदेश के अनुपालन के बाद अवमानना याचिका का निपटारा!
स्ट्रीट लाइट पर उड़ रहे जनता के पैसे! नागपुर मनपा का भारी-भरकम बिजली बिल, प्रशासनिक लापरवाही पर उठे सवाल
यह भी पढ़ें:- भगत सिंह कोश्यारी को पद्मभूषण पर भड़के संजय राउत, बोले- संविधान की हत्या करने वालों का सम्मान मंजूर नहीं
पुरानी और नई व्यवस्था के बीच फंसा नागपुर
चार साल तक निर्वाचित प्रतिनिधियों के बिना चले प्रशासन ने संपत्तियों का ऐसा ‘तदर्थ’ उपयोग किया कि अब सत्ता हस्तांतरण के समय भारी अव्यवस्था देखने को मिल रही है। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि क्या गाड़ियों की कमी केवल एक बहाना है या यह लंबे समय तक रहे ‘प्रशासक राज’ के कुप्रबंधन का नतीजा।
