FTA की खुशी LPG ने छीनी! नागपुर के 72% छोटे MSMEs पर तालेबंदी का खतरा, हजारों नौकरियां दांव पर
Nagpur MSME Crisis: नागपुर के 72% लघु उद्योग संकट में! FTA की खुशी पर LPG किल्लत का साया। हिंगना MIDC में PNG सुविधा न होने से बढ़ी मुश्किलें। उद्योगों ने जताई छंटनी की आशंका।
- Written By: प्रिया जैस
एलपीजी गैस (सौजन्य-सोशल मीडिया)
LPG Shortage Industry: फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से जहां एक ओर निर्यात और व्यापार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद थी वहीं दूसरी ओर एलपीजी की बढ़ती कीमतों और कमर्शियल सिलेंडरों पर लगे प्रतिबंध ने छोटे और मध्यम उद्योगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। उद्योग संगठनों के अनुसार एलपीजी पर लगाए गए प्रतिबंध से 72 प्रतिशत एमएसएमई आर्थिक दबाव में आ गए हैं।
उद्योग प्रतिनिधियों का कहना है कि कई इंडस्ट्रीज की उत्पादन प्रक्रिया में एलपीजी का व्यापक उपयोग होता है। एफटीए के कारण विदेशी बाजारों में अवसर बढ़ने से खुशी हुई थी लेकिन अब बढ़ती ऊर्जा लागत और एलपीजी प्रतिबंध से कई एमएसएमई इन अवसरों का पूरा लाभ उठाने से भी वंचित रह जाएंगे। कई इकाइयों ने उत्पादन घटाने या अस्थायी रूप से बंद करने तक का निर्णय लिया है।
बेरोजगार हो सकते हैं कई लोग
उद्योगपतियों का कहना है कि एमएसएमई अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और रोजगार में इनकी अहम भूमिका है। ऐसे में इस क्षेत्र को राहत देने के लिए नीतिगत कदम उठाना जरूरी है, ताकि उद्योगों को एलपीजी मिल सके और वे एफटीए से मिलने वाले लाभ का फायदा उठा सकें।
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एलपीजी की आपूर्ति पर अचानक लगाए गए प्रतिबंध से औद्योगिक इकाइयों में गहरी चिंता और अनिश्चितता की स्थिति उत्पन्न हो गई है। कई एमएसएमई इकाइयों के लिए एलपीजी केवल एक विकल्प नहीं बल्कि उत्पादन प्रक्रिया का अनिवार्य हिस्सा है। इसकी उपलब्धता में किसी भी प्रकार की बाधा सीधे तौर पर उत्पादन गतिविधियों को प्रभावित कर सकती है और नियमित औद्योगिक संचालन को बाधित कर सकती है।
उद्योगपतियों के अनुसार सरकार से एलपीजी पर राहत देने और ऊर्जा लागत कम करने की मांग की है। यदि ऐसा नहीं होता है तो छोटे उद्योगों के लिए बाजार में टिके रहना मुश्किल हो सकता है।
PNG की भी नहीं है सुविधा
उद्योगपतियों का कहना है कि एमआईडीसी हिंगना की हालत इसलिए भी अधिक गंभीर है क्योंकि क्षेत्र में बड़ी संख्या में उद्योगों को पाइप्ड नेचुरल गैस जैसी वैकल्पिक ईंधन सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। पीएनजी कनेक्टिविटी के अभाव में उद्योगों के पास सीमित विकल्प ही बचते हैं।
अन्य ईंधनों जैसे फर्नेस ऑयल, डीजल या कोयला आधारित प्रणालियों पर स्थानांतरित होना न केवल पर्यावरण की दृष्टि से उचित नहीं है बल्कि तकनीकी रूप से भी जटिल और आर्थिक रूप से महंगा है, विशेषकर उन एमएसएमई इकाइयों के लिए जो पहले से ही सीमित संसाधनों के साथ कार्य कर रही हैं।
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हीटिंग सिस्टम के अनुरूप की गई डिजाइन
एमआईडीसी में कई उद्योगों की उत्पादन प्रणालियां विशेष रूप से एलपीजी आधारित हीटिंग सिस्टम के अनुरूप डिजाइन की गई हैं। ऐसे में अन्य ईंधनों में बदलाव करने के लिए नई मशीनरी, उपकरणों में संशोधन, अतिरिक्त निवेश, तकनीकी परीक्षण और विभिन्न अनुमोदनों की आवश्यकता पड़ेगी।
यह प्रक्रिया समय लेने वाली है और इसे अल्पकाल में लागू करना अधिकांश एमएसएमई इकाइयों के लिए संभव नहीं है। एफटीए से उम्मीद जागी थी कि एमएसएमई का कारोबार बढ़ेगा लेकिन अब तक एलपीजी संकट उद्योगों की कमर ही तोड़ डाली है।
– पी. मोहन, अध्यक्ष, एमआईए
उद्योगों को बचाना जरूरी
एलपीजी प्रतिबंध का व्यापक प्रभाव पूरे औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र को गड़बड़ कर सकता है। यदि उत्पादन प्रभावित होता है तो इससे आपूर्ति शृंखला, कच्चे माल के आपूर्तिकर्ता, परिवहन क्षेत्र और अन्य सेवाओं से जुड़े व्यवसाय भी प्रभावित होंगे। इसके साथ ही बड़ी संख्या में कार्यरत श्रमिकों के रोजगार पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। एलपीजी पर लगाए गए प्रतिबंध पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।
– किशोर मालवीय, अध्यक्ष, बीएमए
