नागपुर: करोड़ों के ‘एमरेक्स ट्रेड मनी’ निवेश घोटाले में बड़ा फैसला, कोर्ट ने विनोद उप्रे समेत अन्य को किया बरी
Nagpur MPID Court: विशेष एमपीआईडी अदालत के न्यायाधीश एनएच जाधव ने 'एमरेक्स ट्रेड मनी' घोटाले के आरोपी विनोद उप्रे व अन्य को बरी कर दिया। बचाव पक्ष के अनुसार सीधा वित्तीय लेन-देन साबित नहीं हुआ।
- Written By: रूपम सिंह
Court प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स- सोशल मीडिया)
Nagpur MPID Court Investment Scam: विशेष एमपीआईडी अदालत ने चर्चित ‘एमरेक्स ट्रेड मनी’ और ‘माय एम’ ट्रेड में कथित निवेश घोटाले में आरोपी बनाए गए विनोद उप्रे समेत अन्य आरोपियों को बरी कर दिया है। यह फैसला विशेष न्यायाधीश एनएच जाधव की अदालत ने सुनाया।
मामले में करोड़ों रुपये के गबन और फर्जी निवेश योजना के जरिए लोगों को ठगने के आरोप लगाए गए थे। शिकायतकर्ता राकेश चौरागड़े ने आरोप लगाया था कि उन्हें और अन्य निवेशकों को इन कंपनियों में निवेश करने के लिए प्रेरित किया गया। यह कहकर प्रलोभन दिया गया कि 18 सप्ताह में रकम दोगुनी कर दी जाएगी।
साथ ही आकर्षक इंसेंटिव, हॉलिडे पैकेज और क्रिप्टो करेंसी देने का भी वादा किया गया था। शिकायत में यह भी कहा गया था कि कंपनी के अधिकारियों द्वारा कई आईडी बनाई गई थीं और निवेशकों को नए लोगों को जोड़कर चेन तैयार करने के लिए कहा जाता था, ताकि अधिक लाभमिल सके। आरोप था कि कई लोगों ने बड़ी रकम निवेश की। शुरुआती दौर में कुछ भुगतान मिला लेकिन बाद में उन्हें न तो रकम वापस मिली और न ही वादा किए गए अन्य लाभ।
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इन्हीं आरोपों के आधार पर विनोद उप्रे और अन्य आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से एपीपी अभय जिकार ने 22 गवाहों के बयान दर्ज कराते हुए सभी आरोपियों को दोषी ठहराने की मांग की। वहीं आरोपी विनोद की पैरवी कर रहे अधिवक्ता कमल सतुजा और अधिवक्ता कैलाश डोडानी ने अदालत को बताया कि उनके मुवक्किल और अन्य आरोपियों को गलत तरीके से मामले में फंसाया गया है।
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बचाव पक्ष ने जिरह के दौरान यह तथ्य सामने रखा कि जिन 2 संस्थाओं का उल्लेख किया गया वे कंपनियां उप्रे कुमार सिंह की प्रोप्राइटरशिप फर्म थी, जबकि दूसरी संजीव कुमार और होशियार सिंह की साझेदारी फर्म थी जिनसे अन्य आरोपियों का कोई संबंध नहीं था।
बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि अभियोजन पक्ष का कोई भी गवाह, यहां तक कि जांच अधिकारी भी, ऐसा कोई दस्तावेज पेश नहीं कर पाया जिससे साबित हो सके कि निवेशकों ने सीधे तौर पर विनोद उप्रे या अन्य आरोपियों के पास रकम जमा कराई थी।
