यवतमाल में तेजस्विनी को-ऑपरेटिव्ह पतसंस्था ने निवेशकों को लगाया 10 करोड़ का चूना, झांसा देकर संचालक मंडल फरार
Yavatmal News: यवतमाल में तेजस्विनी को-ऑपरेटिव्ह वुमन सोसायटी के संचालकों ने 24% रिटर्न का लालच देकर निवेशकों से 10 करोड़ रुपये ठगे और फरार हो गए। मामले में प्रशासक नियुक्त किया गया है।
- Written By: रूपम सिंह
तेजस्विनी को-ऑपरेटिव्ह धोखाधड़ी का मामला (सौ. सोशल मीडिया )
Yavatmal Tejaswini Cooperative Fraud Case: यवतमाल शहर में तेजस्विनी को-ऑपरेटिव्ह वुमन सोसायटी पतसंस्था के माध्यम से बड़े पैमाने पर आर्थिक धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। निवेशकों को लगभग 10 करोड़ रुपये का चूना लगाकर संचालक मंडल फरार हो गया है, जिससे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। इस मामले में संस्थापक प्रमोद सुधाकर शिंदे सहित पूरे संचालक मंडल पर गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं।
संचालकों में प्रमोद सुधाकर शिंदे, श्रद्धा प्रमोद शिंदे, जयश्री अनिल बिजवे, नेहा अतुल साबले, कंचन संजय शिंदे, आंचल आकाश तेलंग, गंगा संतोष वानखडे, दुर्गा निलेश तेलंग, वनिता प्रेमसिंग पवार, पूनम नेत्रदीप दुधे, प्रीति संदीप टाके, पल्लवी जीवन शिंदे, हेमा पंकजराव गाडबैले और लीना निलकंठ मरसकोल्हे शामिल हैं। जानकारी के अनुसार, इस संस्था ने निवेशकों को 24 प्रतिशत रिटर्न का लालच देकर बड़ी मात्रा में जमा राशि एकत्र की।
अधिक मुनाफे की उम्मीद में कई नागरिकों ने अपनी जीवनभर की बचत इस संस्था में निवेश कर दी। लेकिन समय सीमा पूरी होने के बाद पैसे वापस मिलने के बजाय कार्यालय बंद कर दिया गया और सभी संचालक फरार हो गए। इस मामले में नियमों के उल्लंघन के आरोप भी सामने आ रहे हैं। सहायक निबंधक अनिल नाईक की भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं। 6 अप्रैल 2026 को यवतमाल जिला उपनिबंधक द्वारा प्रशासक के रूप में ओंकार पहुरकर की नियुक्ति की गई थी। इसके बाद 16 अप्रैल को प्रशासक द्वारा
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संस्था पर गंभीर आरोप
गंभीर आरोप यह भी है कि संस्था की नियमित ऑडिट प्रक्रिया नहीं हुई और नियमों के खिलाफ तीन संचालकों की नियुक्ति की गई। बिना चुनाव के मनमाने ढंग से नियुक्ति किए जाने का दावा किया जा रहा है। साथ ही संस्था की वार्षिक आम सभा (AGM) भी नहीं होने की बात सामने आई है।
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कार्यालय का पंचनामा किया गया। इस दौरान सहायक निबंधक निनावे, लेखापरीक्षक गुधाणे और अन्य कर्मचारी उपस्थित थे। कार्यालय का ताला खोलकर निरीक्षण किया गया। निवेशकों का आरोप है कि उपनिबंधक नानासाहेब चव्हाण ने वर्ष 2023-24 और 2024-25 का ऑडिट होने की बात कही, जिसमें केवल एक करोड़ रुपये का लेन-देन बताया गया।
हालांकि 2025-26 के ऑडिट के बारे में सॉफ्टवेयर बंद होने का – कारण देकर कोई ठोस कार्रवाई न करने की बात कही गई। निवेशकों का आरोप है कि अधिकारियों ने संचालकों के सामने कोई सख्त कदम नहीं उठाया। जांच में सामने आया कि जलगांव स्थित सॉफ्टवेयर कंपनी का भुगतान न होने के कारण सॉफ्टवेयर बंद था। लाख 35 हजार रुपये बकाया होने से सॉफ्टवेयर बंद किया गया था।
