
नागपुर न्यूज
Teli Samaj Nagpur: नागपुर मनपा में महापौर पद के लिए गुरुवार को हुई आरक्षण की लॉटरी में भले ही नागपुर महानगर पालिका में महिला खुला वर्ग के लिए आरक्षण तय हुआ हो, किंतु इस बार तेली समाज को प्रतिनिधित्व देने की मांग जोर पकड़ने लगी है। इस बार महापौर पद पर तेली समाज की किसी महिला की नियुक्ति करने की मांग जवाहर विद्यार्थी गृह के अध्यक्ष और पूर्व उपमहापौर शेखर सावरबांधे ने की।
सावरबांधे ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि मनपा में सत्तासीन रहे दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों ने आज तक अपने पक्ष से चुनकर आए तेली समाज के किसी भी नगरसेवक को महापौर नहीं बनाया। उन्होंने बताया कि पिछले 33 वर्षों से इस समाज को महापौर पद से उपेक्षित रखा गया है।
हालांकि दोनों दलों ने ओबीसी वर्ग की अन्य जातियों को कई बार प्रतिनिधित्व दिया, लेकिन तेली समाज को हमेशा नजरअंदाज किया गया। सावरबांधे के अनुसार इस समाज को बार-बार केवल उपमहापौर पद देकर ही संतुष्ट किया गया, जो कि एक बड़ी व्यथा है।
इतिहास का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि 1990 में बबनराव येवले मनपा के इतिहास में तेली समाज के पहले महापौर बने थे, लेकिन वे कांग्रेस के 18 नगरसेवकों की बगावत के कारण इस पद पर पहुंचे थे। इसके बाद 1993 में भाजपा ने निर्दलीय नगरसेवक किशोर डोरले को समर्थन दिया था और वे ‘ईश्वर चिट्ठी’ (लॉटरी) के जरिए महापौर चुने गए थे।
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सावरबांधे ने घोषणा की कि वे इस संबंध में जिले के पालक मंत्री और भाजपा के शहर अध्यक्ष को पत्र सौंपेंगे। चूंकि इस बार महापौर का आरक्षण ‘खुले प्रवर्ग’ के लिए निकला है, इसलिए उन्होंने मांग की है कि राजनीतिक दल साहस दिखाएं और ओबीसी वर्ग के तेली समाज की महिला को महापौर पद पर आसीन करें।
एक ओर जहां सावरबांधे ने तेली समाज की महिला को प्रतिनिधित्व देने की मांग की है, तो दूसरी तरफ राष्ट्रीय ओबीसी मुक्ति मोर्चा के समन्वयक नितिन चौधरी ने ओबीसी महिला पार्षद दिव्या धुरडे को महापौर बनाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि दिव्या धुरडे ने न केवल प्रभाग के विकास में योगदान दिया है, बल्कि पार्टी में भी सक्रिय रहकर कई कार्यों को अंजाम दिया है। नागपुर मनपा में उनके कार्यों और अनुभवों को देखते हुए महापौर बनाने की मांग की।






